सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के सेक्रेटरी घुमारे के तबादले पर रोक से इनकार किया
अवमानना कार्यवाही पर रोक नहीं, 28 सितंबर को अगली सुनवाई तय
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के सेक्रेटरी दिलीप एस. घुमारे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इंकार किया है और मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर, 2026 को निर्धारित की है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को अदालत में अनुचित भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए, जबकि महाराष्ट्र में ज्यूडिशियल पदों की भारी कमी भी सामने आई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के कानून विभाग के सेक्रेटरी और वरिष्ठ अधिकारी दिलीप एस. घुमारे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में शुरू की गई अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किया है।
अवमानना कार्यवाही और कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने घुमारे के आचरण पर गंभीर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट में तेज आवाज़ में बहस करने और पदों के न भरे जाने के लिए अदालत को जिम्मेदार ठहराने के कारण अवमानना कार्यवाही शुरू की गई थी। कोर्ट ने कहा, "कोई अधिकारी आकर कोर्ट में चिल्ला नहीं सकता" और घुमारे को अपने शब्दों पर पछतावा करने को कहा।
घुमारे का पक्ष और अगली सुनवाई
घुमारे के वकील ने बताया कि उन्होंने पहले ही माफी मांग ली है और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने उनके व्यवहार को चिल्लाने की सीमा के करीब बताया था, न कि चिल्लाने वाला कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही में अंतिम आदेश पारित करने से रोक लगाई है और मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर, 2026 को होगी।
जजों की खाली पदों पर सवाल
एडवोकेट विकास सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र में 1,101 मंजूर ज्यूडिशियल पदों में से केवल 385 ही भरे गए हैं। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 1,200 अदालतें स्थापित करने की मांग 10 वर्षों से लंबित है।
कोर्ट का निर्देश और प्रशासनिक सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया गया तो गलत संकेत जाएगा। जस्टिस नाथ ने कहा, "चाहे देरी या किसी अन्य बात के लिए हाई कोर्ट जिम्मेदार हो, न्यायिक अधिकारी को कोर्ट में, जब उसे हलफनामे का जवाब देने के लिए बुलाया गया हो, यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि आप ही जिम्मेदार हैं।" कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी और हाई कोर्ट के हितों में संतुलन बनाए रखने के लिए फिलहाल अवमानना कार्यवाही में अंतिम फैसले से घुमारे को सुरक्षा दी है।
यह मुद्दा इसलिए उठा, क्योंकि ज्यूडिशियल पदों को मंजूरी तो मिल गई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें भरा नहीं
एडवोकेट विकास सिंह
तबादला सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है
सुप्रीम कोर्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- घुमारे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू की गई थी?
- हाईकोर्ट में घुमारे के तेज आवाज़ में बहस करने और खाली पड़े पदों के लिए अदालत को जिम्मेदार ठहराने के कारण अवमानना कार्यवाही शुरू की गई थी।
- घुमारे ने क्या कदम उठाए हैं इसके बाद?
- घुमारे ने माफी मांग ली है और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है।
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