सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के कल्याण पर नोटिस जारी किया
जनहित याचिका में केंद्र और राज्यों को व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, राज्यों और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के लिए समन्वित कानूनी व कल्याणकारी तंत्र न होने के कारण उनकी स्थिति असुरक्षित है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के कल्याण, सोशल सिक्योरिटी और रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे
यह याचिका ऑल-इंडिया टीचर्स फेडरेशन की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगीमोल जॉर्ज ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए कोई समन्वित कानूनी और प्रशासनिक कल्याणकारी ढांचा नहीं है। याचिका में बताया गया कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था बिखरी हुई है और राज्यों के नियमों, संस्थानों के तरीकों और कॉन्ट्रैक्ट शर्तों पर निर्भर है, जिससे शिक्षकों की नौकरी की शर्तों और कल्याण लाभों में असमानता होती है।
कानूनी और सामाजिक सुरक्षा की कमी
याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए कोई विशेष नेशनल वेलफेयर बोर्ड या राष्ट्रीय संस्थागत तंत्र मौजूद नहीं है जो पेंशन, चिकित्सा सहायता, बीमा, परिवार कल्याण और अन्य सामाजिक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करे। इसके कारण शिक्षक रिटायरमेंट के बाद आर्थिक असुरक्षा और अन्य कठिनाइयों का सामना करते हैं।
कानूनों का प्रभाव और भेदभाव
याचिका में संसद द्वारा बनाए गए विभिन्न लेबर और सोशल सिक्योरिटी कानूनों का उल्लेख है, लेकिन ये कानून प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के लिए व्यापक कल्याणकारी व्यवस्था नहीं बनाते। याचिका में यह भी कहा गया कि एक जैसे काम करने वाले शिक्षकों को उनके राज्य या प्रबंधन की नीति के आधार पर अलग-अलग सेवा शर्तें और सुरक्षा मिलती हैं, जो आर्टिकल 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।
शिक्षकों और छात्रों की संख्या
याचिका में सरकारी UDISE+ 2023–24 डेटा का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में लगभग 14.72 लाख स्कूल, 98 लाख से अधिक शिक्षक और लगभग 24.8 करोड़ छात्र हैं।
पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अन्य स्कूलों से जुड़ी याचिकाओं पर भी निर्णय दिए हैं, जिनमें यूपी और राजस्थान के स्कूलों में प्रवेश प्रतिबंध याचिका खारिज करना शामिल है।
हमने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
सुप्रीम कोर्ट बेंच, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- यह याचिका किसने दायर की है और इसका उद्देश्य क्या है?
- यह याचिका ऑल-इंडिया टीचर्स फेडरेशन की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगीमोल जॉर्ज ने दायर की है, जिसका उद्देश्य प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के लिए समन्वित कल्याणकारी ढांचा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- प्राइवेट स्कूल शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा क्यों नहीं मिल रही है?
- क्योंकि प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के लिए कोई राष्ट्रीय वेलफेयर बोर्ड या संस्थागत तंत्र नहीं है, जो पेंशन, चिकित्सा सहायता, और बीमा जैसे उपाय सुनिश्चित करे।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद








Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.