सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी के मानहानि मामले में सब बराबर, सुनवाई के लिए आवेदन करें
राहुल गांधी के बयान से जुड़ा मानहानि मामला सुप्रीम कोर्ट में, CJI ने प्रक्रिया का पालन जरूरी बताया
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के मानहानि मामले में कहा है कि सभी पक्ष न्यायालय में समान हैं और सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करना होगा। यह मामला 16 दिसंबर 2022 के राहुल गांधी के बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भारत-चीन सीमा पर हुई घटना पर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा कि बिना प्रक्रिया के किसी मामले को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में कहा है कि कोर्ट में सभी पक्ष समान हैं और तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने को कहा गया है। यह मामला राहुल गांधी के 16 दिसंबर 2022 के बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर टिप्पणी की थी।
मामले का इतिहास और सुनवाई
यह मानहानि मामला राहुल गांधी के 16 दिसंबर 2022 के बयान से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि यह मामला बार-बार टलता रहा है और याचिकाकर्ता खुद तय तारीखों पर पेश नहीं हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और आदेश
उन्होंने शिकायतकर्ता से कहा कि यदि वह जल्द सुनवाई चाहते हैं तो इसके लिए विधिवत आवेदन दाखिल करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी भी मामले को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, चाहे पक्ष कोई भी हो।
मामले से जुड़ी कानूनी बातें
यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राहुल गांधी की अपील से जुड़ा है, जिसमें लखनऊ कोर्ट के समन को सही ठहराया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 199(1) के तहत कोई व्यक्ति जो अपराध का प्रत्यक्ष पीड़ित नहीं है, उसे भी 'पीड़ित व्यक्ति' माना जा सकता है यदि उसे नुकसान हुआ हो या वह प्रभावित हुआ हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी पक्षों के लिए समान नियम लागू होंगे।
राहुल गांधी कोई वीवीआईपी (VVIP) नहीं हैं और मजिस्ट्रेट की ओर से संज्ञान लेने के खिलाफ राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील पिछले पांच महीनों से सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं की गई है।
गौरव भाटिया, एडवोकेट
हमारे सामने सब बराबर हैं।
सूर्यकांत, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुनवाई के लिए आवेदन कैसे दाखिल किया जा सकता है?
- शिकायतकर्ता को विधिवत आवेदन दाखिल करना होगा, जिसके बाद कोर्ट मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगा।
- यह मामला किस कोर्ट के आदेश के खिलाफ है?
- यह अपील इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें लखनऊ कोर्ट के समन को सही ठहराया गया था।
- सुनवाई क्यों पहले नहीं हो पाई?
- मामला बार-बार टला क्योंकि याचिकाकर्ता तय तारीखों पर खुद पेश नहीं हुए हैं।
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