सीजेआई सूर्यकांत ने छात्र को पांच लाख रुपये का नोटिस मिलने पर जताई नाराजगी
जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस जारी करने पर मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारी से जवाब मांगा
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा के छात्र अक्षत त्रिपाठी को पांच लाख रुपये का नोटिस मिलने पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा। यह नोटिस जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में जारी किया गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। नोटिस प्रशासन द्वारा शांति बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम के तहत जारी किया गया था।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को पांच लाख रुपये का नोटिस मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की हिम्मत कैसे हुई और संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा है। यह नोटिस छात्र के जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के कारण जारी किया गया था।
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में पेपर लीक के खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी और किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने चार सितंबर को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने के लिए नोटिस जारी किया था। पुलिस का आरोप था कि छात्र ने अन्य विद्यार्थियों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार किया था। हालांकि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।
अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उस समय विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहे थे। पीटीआई भाषा के अनुसार, शांति बंधपत्र नोटिस कोई सजा नहीं बल्कि प्रशासन का एहतियाती कदम होता है, जिसमें व्यक्ति से आश्वासन लिया जाता है कि वह शांति बनाए रखेगा और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहेगा।
यह कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130, 126 और 135 के तहत शुरू की गई थी। नोटिस में कहा गया था कि ऐसी गतिविधियों से तनाव और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जंतर मंतर पर प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद सरकार ने सीजेपी के बैनर तले आंदोलन कर रही जनता की मांगों को स्वीकार करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटा दिया था। इसके बाद प्रल्हाद जोशी को इस पद पर नियुक्त किया गया।
उस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक करीब 25 दिनों तक भूख हड़ताल पर थे। सीजेपी ने इस्तीफे के अलावा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और केस वापस लेने की मांग की थी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अक्षत त्रिपाठी ने नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे और उस समय विश्वविद्यालय की कक्षाओं में उपस्थित नहीं थे।
- नोटिस वापस क्यों लिया गया?
- नोटिस प्रशासन का एहतियाती कदम था और बाद में इसे वापस ले लिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कोई सजा नहीं थी।
- सीजेपी ने अपनी और क्या मांगें की थीं?
- सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा तथा केस वापस लेने की मांग भी की थी।
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