क्राइम 3 MIN READ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: कंपनी पर केस के लिए कर्मचारी का नाम जरूरी नहीं

कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही में आरोपी कर्मचारी की पहचान न होना केस खत्म करने का कारण नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी या अधिकारी का नाम आरोपी न होने पर कंपनी के खिलाफ केस खत्म नहीं किया जा सकता। यह फैसला दवा कंपनी सनोफी इंडिया लिमिटेड के मामले में आया है।
AI सार

सुप्रीम कोर्ट ने सनोफी इंडिया लिमिटेड मामले में कहा है कि कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में किसी कर्मचारी या अधिकारी का नाम जरूरी नहीं होता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कंपनी की आपराधिक जिम्मेदारी उसके कार्यों और लेन-देन से जुड़ी होती है, और किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति (मेंस रिया) का आकलन ट्रायल के दौरान किया जाएगा। मामले में कर्मचारी का नाम नहीं होना आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का आधार नहीं बनता।

AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें

सुप्रीम कोर्ट का फैसला कॉर्पोरेट अपराध पर
सुप्रीम कोर्ट का फैसला कॉर्पोरेट अपराध पर / सोशल मीडिया

निहारिका टाइम्स को Google पर अपना पसंदीदा सोर्स बनाए

Follow us on Google

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला दवा कंपनी सनोफी इंडिया लिमिटेड के मामले में आया है।

फैसले का सार

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सनोफी इंडिया लिमिटेड की अपील खारिज कर दी। यह मामला भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के लिए दवाओं की खरीद से जुड़ा सीबीआई केस है। आरोपपत्र में कंपनी के किसी कर्मचारी या अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह अपने आप में आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का आधार नहीं बन सकता।

कंपनी की आपराधिक जिम्मेदारी उसके काम, फैसलों और लेन-देन से जुड़ी होती है, जिसके लिए किसी खास व्यक्ति की पहचान जरूरी नहीं होती। कोर्ट ने बताया कि किस व्यक्ति को कंपनी से जोड़ा जाए, इसका आकलन ट्रायल के दौरान होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनियों को आपराधिक कार्यवाही खत्म करने के सामान्य नियमों से कोई विशेष छूट नहीं है। हालांकि, कंपनी पर मुकदमा तभी चल सकता है जब अपराध की प्रकृति ऐसी हो कि उसमें व्यक्तिगत दुर्भावनापूर्ण मंशा जरूरी हो और कंपनी वह अपराध कर सके।

कानूनी व्याख्या और मेंस रिया

फैसले में कोर्ट ने 'मेंस रिया' की व्याख्या की, जिसका मतलब है कि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति या नीयत क्या थी। अगर नीयत खराब थी तो कानून उसे मेंस रिया मानकर सजा देता है। कोर्ट ने कहा कि शुरुआती चरण में आसपास के तथ्यों और परिस्थितियों से मेंस रिया का अनुमान लगाया जा सकता है।

न्यायालय ने बताया कि मेंस रिया अपराधों में कॉर्पोरेट आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े सवाल काफी मुश्किल होते हैं। इसलिए किसी कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने के लिए यह जरूरी नहीं कि जांच के शुरुआती चरण में उस व्यक्ति की पहचान हो, जिसके कृत्य और मानसिक स्थिति को कंपनी से जोड़ा जा रहा है।

न्यायालय की प्रक्रिया और आगे की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने तीन चरणों वाला नया क्रमबद्ध ढांचा बताया है, जिसके तहत यह तय किया जाएगा कि किसी व्यक्ति के कृत्य और उसकी आपराधिक मंशा को कंपनी से कैसे जोड़ा जाए। इस पूरे क्षेत्र के कानून में सुधार और समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है।

फैसले में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने 98 पन्नों में कंपनियों के आपराधिक दायित्व से जुड़े कानून और सिद्धांतों की विस्तार से व्याख्या की।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी पर तभी मुकदमा नहीं चल सकता जब अपराध में केवल जेल की सजा हो या अपराध की प्रकृति ऐसी हो कि उसमें व्यक्तिगत दुर्भावनापूर्ण मंशा जरूरी हो और कंपनी वह अपराध कर ही न सकती हो।

मामले का पृष्ठभूमि

यह मामला दवा बनाने वाली कंपनी सनोफी इंडिया लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही खत्म करने से इनकार किया गया था।

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के एक अधिकारी ने सनोफी इंडिया के साथ मिलकर महंगी दरों पर दवाएं खरीदीं और इसके बदले रिश्वत दी गई। कंपनी ने दावा किया था कि उसके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता क्योंकि उसकी अपनी कोई आपराधिक मंशा नहीं हो सकती और दोषी पाए जाने पर कंपनी को जेल भी नहीं भेजा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।

किसी कर्मचारी का नाम आरोपी के तौर पर नहीं होना, अपने आप में कंपनी के खिलाफ केस खत्म करने की वजह नहीं बन सकता

सुप्रीम कोर्ट

चार्जशीट को पहली नजर में यह दिखाना चाहिए कि अपराध कंपनी ने खुद किया है

सुप्रीम कोर्ट

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने मेंस रिया का आकलन ट्रायल में क्यों किए जाने की बात कही?
क्योंकि मेंस रिया में व्यक्ति की मानसिक स्थिति की जटिलता होती है, जिसे शुरुआती जांच में सही ढंग से अनुमान लगाना मुश्किल होता है।
अब कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में कैसे कार्रवाई होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने तीन चरणों वाला नया ढांचा बताया है, जिसके तहत किसी व्यक्ति के कृत्य और मंशा को कंपनी से जोड़ने का फैसला ट्रायल में किया जाएगा।
इस फैसले का कंपनियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
कंपनियों को आपराधिक मामलों से बचने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कामकाज में व्यक्तिगत दुर्भावनापूर्ण मंशा न हो, अन्यथा मुकदमा संभव है।

AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें

Member Access

50 free articles left today

0 of 50 free reads used today.

Go Unlimited
📲 हमसे जुड़ें ताज़ा खबरें सीधे आपके फोन पर — तुरंत, मुफ़्त
Telegram Channel

पाठकों की पसंद

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं

01 दुनिया फराह खान के तीनों बच्चे अमेरिका के कॉलेजों में दाखिला लेकर रवाना
02 नौकरी / करियर 27 वर्षीय शारदेंदु ने 46 लाख की नौकरी छोड़ सेना में की भर्ती
03 दुनिया भारत ने समान-क्षेत्रफल नक्शा प्रोजेक्शन के व्यापक उपयोग का समर्थन किया
04 राजस्थान माउंट आबू में 73 प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित
Trust & Transparency

How this story was handled

Published8 सितंबर 2026, 13:54 IST IST
Last updated8 सितंबर 2026, 13:54 IST IST
Latest newsroom actionnews-desk (section_editor)
Story lifecyclePublish
Methodology

How to read this report

Coverage is filed under क्राइम and aligned with that desk's editorial standards.
Key topic markers used in this story: क्राइम.
Update Log

Recent newsroom changes

The Editorial Desk published this story as published

Continuing Coverage

More on this story

Latest context and follow-up reading from क्राइम.

क्राइम

पीजी मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी

क्राइम

बदायूं में पुलिस कस्टडी से आरोपी भागा, तीन पुलिसकर्मी निलंबित

कानून / कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- मृत सफाई कर्मचारियों को 30 लाख मुआवजा मिले

कानून / कोर्ट

हिमुडा सीईओ नियुक्ति रद्द, CAPF में IPS डेपुटेशन पर जवाब मांगा

देश

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने को कहा

Recommended Stories

More from क्राइम
पीजी मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी
क्राइम
इससे जुड़ी ख़बरें

पीजी मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क 7 सितंबर 2026
बदायूं में पुलिस कस्टडी से आरोपी भागा, तीन पुलिसकर्मी निलंबित
क्राइम
इससे जुड़ी ख़बरें

बदायूं में पुलिस कस्टडी से आरोपी भागा, तीन पुलिसकर्मी निलंबित

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क 8 सितंबर 2026
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- मृत सफाई कर्मचारियों को 30 लाख मुआवजा मिले
कानून / कोर्ट
इससे जुड़ी ख़बरें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- मृत सफाई कर्मचारियों को 30 लाख मुआवजा मिले

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क 5 सितंबर 2026
हिमुडा सीईओ नियुक्ति रद्द, CAPF में IPS डेपुटेशन पर जवाब मांगा
कानून / कोर्ट
इससे जुड़ी ख़बरें

हिमुडा सीईओ नियुक्ति रद्द, CAPF में IPS डेपुटेशन पर जवाब मांगा

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क 6 सितंबर 2026
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने को कहा
देश
इससे जुड़ी ख़बरें

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने को कहा

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क 7 सितंबर 2026

पाठकों की पसंद

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं

01 दुनिया फराह खान के तीनों बच्चे अमेरिका के कॉलेजों में दाखिला लेकर रवाना
02 नौकरी / करियर 27 वर्षीय शारदेंदु ने 46 लाख की नौकरी छोड़ सेना में की भर्ती
03 दुनिया भारत ने समान-क्षेत्रफल नक्शा प्रोजेक्शन के व्यापक उपयोग का समर्थन किया
04 राजस्थान माउंट आबू में 73 प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित

Comments

0 threads
Join the discussion
Staff comments are highlighted. Verified readers receive a trust badge.
Sign in to comment

No approved comments yet. Start the discussion.