सुप्रीम कोर्ट ने जबरन रिटायर किए गए अधिकारी को 15 लाख मुआवजे का आदेश दिया
कोर्ट ने केंद्र सरकार को सम्मानजनक विदाई और मुआवजा देने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय व्यापार सेवा के एक अधिकारी की जबरन समय से पहले अनिवार्य रिटायरमेंट को रद्द करते हुए केंद्र सरकार को उसे 15 लाख रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अधिकारी को सम्मानजनक विदाई देने और सेवा से जुड़े सभी लाभ जारी रखने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी नए प्रतिकूल रिकॉर्ड के अधिकारी को मनमाना रूप से सेवा से हटाना गलत है।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व भारतीय व्यापार सेवा अधिकारी की जबरन समय से पहले अनिवार्य रिटायरमेंट को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि अधिकारी को 9 लाख रुपये मानहानि का मुआवजा और 6 लाख रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में कुल 15 लाख रुपये दिए जाएं। साथ ही अधिकारी को सम्मानजनक विदाई दी जाए।
सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति
उन्हें लगातार बेहतरीन ग्रेडिंग मिली। फरवरी 2018 में यूपीएससी की मंजूरी और योग्यता के आधार पर उन्हें संयुक्त सचिव पद पर पदोन्नति मिली। विभाग द्वारा पदोन्नति देने के महज दो महीने बाद ही 10 मई 2018 को फंडामेंटल रूल 56(j) के तहत उन्हें जबरन समय से पहले रिटायर कर दिया गया।
कोर्ट का फैसला और टिप्पणी
पदोन्नति मिलने के बाद महज दो महीने में सेवा से हटाना मनमाना और अधिकारों का गलत इस्तेमाल है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को वैसी ही विदाई मिलनी चाहिए थी जैसी निर्धारित सेवानिवृत्ति पर मिलती।
मुआवजा और सम्मानजनक विदाई
कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि अधिकारी को मानहानि के लिए 9 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 6 लाख रुपये दिए जाएं। कुल मुआवजा 15 लाख रुपये होगा। साथ ही विदेश व्यापार महानिदेशालय के अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे अधिकारी को पूरे सम्मान के साथ कार्यालय बुलाकर विदाई दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को सेवा से जुड़े सभी लाभ ऐसे दिए जाएं जैसे वे कभी अनिवार्य रूप से रिटायर नहीं हुए हों।
बेदाग सेवा रिकॉर्ड और लगातार उत्कृष्ट मूल्यांकन वाले अधिकारी को बिना किसी नए प्रतिकूल रिकॉर्ड के अचानक डेडवुड या संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाला अधिकारी नहीं बताया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट
अनिवार्य रिटायरमेंट का उद्देश्य ऐसे सरकारी कर्मचारियों को सेवा से हटाना है, जो जनहित की कसौटी पर अपनी उपयोगिता खो चुके हों
सुप्रीम कोर्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी को कुल मुआवजा क्यों दिया?
- कोर्ट ने यह मुआवजा अधिकारी को मनमाना और गलत तरीके से समय से पहले रिटायर किए जाने के कारण दिया।
- अधिकारी की जबरन रिटायरमेंट का आधार क्या था?
- अधिकारी को फंडामेंटल रूल 56(j) के तहत रिटायर किया गया था।
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