सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर जवाब मांगा
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति की समीक्षा के संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर जवाब मांगा है और समयबद्ध जांच के लिए निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रतिनियुक्ति से मूल कैडर के अधिकारियों के करियर और पदोन्नति पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा, लापता बच्चों के मामलों में विशेष जांच प्रक्रिया और निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण के लिए नीति बनाने की याचिका पर भी सुनवाई की जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर जवाब मांगा है। न्यायालय ने इस मामले में समयबद्ध जांच और विशेष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इससे सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति और करियर को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
आईपीएस प्रतिनियुक्ति की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल उठाए हैं कि क्या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में उनके मूल कैडर के सक्षम अधिकारी नहीं हैं, इसलिए आईपीएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया जा रहा है। इससे 25-30 साल तक सेवा देने वाले अधिकारियों को शीर्ष पदों पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। वर्तमान में कई आईपीएस अधिकारी कमांडेंट रैंक में नियुक्त हैं, जबकि पहले डीआइजी, आईजी और एडीजी पदों पर ही नियुक्ति होती थी। इससे उनके करियर और प्रमोशन पर संकट गहरा रहा है। प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच से सात साल निर्धारित की जा रही है, जिससे मूल कैडर के अधिकारी पदोन्नति की राह देखते-देखते रिटायर हो रहे हैं। इनमें बीएसएफ, सीआइएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और आईटीबीपी में सेवा देने वाले अधिकारी शामिल हैं।
लापता बच्चों के मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने लापता, अपहृत और अपहरण किए गए बच्चों के मामलों में प्रणालीगत विफलताओं को लेकर केंद्र, राज्यों और संबंधित मंत्रालयों को नोटिस जारी किया है। याचिका में राष्ट्रीय जांच तंत्र, विशेष जांच प्रक्रिया और समर्पित अदालतों की स्थापना की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि शिकायतें केवल 'लापता व्यक्तियों' के रूप में दर्ज होती हैं, न कि एफआईआर के रूप में, जिससे जांच में देरी होती है और बच्चों की बरामदगी की संभावना कम हो जाती है। याचिका में अपहरणकर्ताओं पर सख्त आर्थिक दंड और संपत्ति जब्ती का सुझाव भी दिया गया है।
प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के कल्याण के लिए याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की याचिका पर सुनवाई के लिए केंद्र, राज्यों और अन्य संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। याचिका में पेंशन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की मांग की गई है। इसके लिए राष्ट्रीय निजी स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड या अन्य संस्था गठित करने का अनुरोध भी किया गया है। याचिका में शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें भारत में 14.72 लाख स्कूल, 98 लाख से अधिक शिक्षक और 24.8 करोड़ छात्र हैं। निजी स्कूलों में 37,30,047 शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन उनके कल्याण के लिए कोई राष्ट्रीय कानूनी तंत्र मौजूद नहीं है।
केंद्र और राज्यों को निर्देश दें कि विशेष जांच प्रक्रिया तैयार करें और सुनिश्चित करें कि अपहरण की जांच ऐसे अधिकारी करें जो एसीपी/एसएचओ के रैंक से नीचे न हों, ताकि समयबद्ध जांच हो।
दैनिक जागरण, स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस प्रतिनियुक्ति की समीक्षा का आदेश क्यों दिया है?
- कई आईपीएस अधिकारी कमांडेंट रैंक में रहते हुए करियर विकास बाधित हो रहा है और मूल कैडर के अधिकारी पदोन्नति से वंचित हो रहे हैं, इसलिए न्यायालय ने इस पर सवाल उठाए हैं।
- लापता बच्चों के मामलों में राष्ट्रीय जांच तंत्र की मांग का उद्देश्य क्या है?
- इसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को तेज़ करना और बच्चों की बरामदगी की संभावना बढ़ाना है, साथ ही समर्पित अदालतों के माध्यम से मामले तेजी से निपटाने की व्यवस्था करना है।
- निजी स्कूल शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की याचिका में क्या मांगे शामिल हैं?
- याचिका में पेंशन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, शिकायत निवारण तंत्र और राष्ट्रीय निजी स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड स्थापित करने की मांग की गई है।
- क्या केंद्र और राज्य सरकारों को अपहरण जांच में कोई विशेष निर्देश दिए गए हैं?
- हाँ, न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामले एसीपी या एसएचओ के रैंक के अधिकारियों द्वारा जांच किए जाएं ताकि समयबद्ध और प्रभावी जांच सुनिश्चित हो सके।
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