एनआईटी जमशेदपुर में जनजातीय महिलाओं की नेतृत्व क्षमता पर संगोष्ठी
राष्ट्रीय संगोष्ठी में महिला शिक्षा, संस्कार और सामाजिक परिवर्तन पर चर्चा
एनआईटी जमशेदपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें जनजातीय महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और महिला शिक्षा पर चर्चा हुई। संगोष्ठी में महिला शिक्षा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने, कौशल विकास, रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में महिला शिक्षा और संस्कार विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें देश भर के शिक्षाविद, विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य महिला शिक्षा को राष्ट्र निर्माण से जोड़कर व्यापक दृष्टिकोण विकसित करना है।
डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि जनजातीय समाज की महिलाओं में नेतृत्व की अपार क्षमता है। वे परिवार, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामुदायिक जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। शिक्षा महिलाओं को उनके अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों और उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक बनाती है।
प्रो. गौतम सूत्रधार ने बताया कि विकसित राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि नेतृत्व केवल पद का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है।
आयोजन में महिला शिक्षा को विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और तकनीकी ज्ञान के अवसर उपलब्ध कराकर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी चर्चा हुई। साथ ही जनजातीय संस्कृति, परंपरा और पहचान के संरक्षण की जरूरत बताई गई।
संगोष्ठी के पहले दिन तकनीकी सत्रों में 21वीं सदी की महिला शिक्षा के संस्कार, मूल्य और सामाजिक परिवर्तन तथा परंपरा, आधुनिकता और पाठ्यक्रम की भारतीय दृष्टि पर विचार-विमर्श हुआ। दूसरे दिन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और समकालीन चुनौतियों पर सत्र आयोजित होंगे।
डॉ. शीतल कुमारी ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. शुक्ला महंती, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की राष्ट्रीय संयोजिका शोभा पाठक, एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. पंकज मित्तल सहित कई अतिथि उपस्थित रहे। संस्थान के कुलसचिव प्रो. सरोज कुमार सारंगी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- डॉ. आशा लकड़ा ने जनजातीय महिलाओं के बारे में क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि जनजातीय महिलाएं परिवार, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामुदायिक जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं।
- संगोष्ठी में कौशल विकास पर क्या चर्चा हुई?
- महिलाओं को रोजगार, उद्यमिता और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया।
- डॉ. शीतल कुमारी का संगोष्ठी में क्या योगदान था?
- उन्होंने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
- संगोष्ठी के पहले दिन किस विषय पर चर्चा हुई?
- पहले दिन तकनीकी सत्रों में महिला शिक्षा के संस्कार, सामाजिक परिवर्तन और भारतीय दृष्टि पर विचार-विमर्श हुआ।
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