बदायूं में एससी-एसटी एक्ट पीड़ित को थाने में बंद कर प्रताड़ित, पांच पुलिसकर्मी निलंबित
एसएसपी ने जांच के बाद उपनिरीक्षक समेत चार सिपाहियों को निलंबित किया, विभागीय कार्रवाई के निर्देश
बदायूं में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में पीड़ित को थाने में बंद कर प्रताड़ित करने के आरोप में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जांच में पुलिसकर्मियों पर मामले में साठगांठ और धमकाने के आरोप सही पाए गए हैं। एसएसपी अंकिता शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि की है।
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जौनपुर। बदायूं में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में पीड़ित को थाने में बंद कर प्रताड़ित करने के आरोप में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी अंकिता शर्मा ने जांच कर प्रभारी मनीष भारद्वाज समेत चार सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि की है।
घटना का विवरण
गांव दियोहरा शेखपुर निवासी कृपाल सिंह 26 अगस्त को बाजार से घर लौट रहे थे, तभी उनकी बाइक फतेहपुर के अनमोल की कार से टकरा गई। विवाद के बाद थाने में समझौता करा दिया गया। उसी शाम अनमोल और उसके साथियों ने कृपाल के घर हमला किया, जिसमें कृपाल, उनके बेटे उदय प्रकाश और अन्य घायल हो गए।
27 अगस्त को जरीफनगर थाने में मारपीट, जानलेवा हमला, धमकाने और एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई। चौकी प्रभारी मनीष भारद्वाज ने आरोपी पक्ष से साठगांठ कर केस वापस कराने का प्रयास किया।
8 सितंबर को मनीष भारद्वाज और चार सिपाहियों ने बिना सूचना दिए पीड़ित के घर दबिश दी, तलाशी ली और अफीम तस्करी के झूठे आरोप में जेल भेजने की धमकी दी। पीड़ित और उसके परिजन को थाने में बंद कर प्रताड़ित किया गया।
पीड़ित ने एसएसपी अंकिता शर्मा को शिकायत की, जिसके बाद जांच कर पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया।
सीओ सहसवान अशोक कुमार सिंह से जांच कराई
एसएसपी अंकिता शर्मा
जांच रिपोर्ट के आधार पर उपनिरीक्षक मनीष भारद्वाज, सुरजीत सिंह, लोकेश, हरीश और संदीप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया तथा इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं
एसएसपी अंकिता शर्मा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सुनिश्चित किया गया है?
- अभी इस संबंध में किये गए किसी विशेष सुरक्षा उपायों का उल्लेख नहीं है।
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