सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
मस्जिद कमेटी ने प्रशासन की कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन बताया
सहारनपुर की सौ साल पुरानी मस्जिद के अवैध हिस्से के ध्वस्तीकरण को लेकर मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें प्रशासन की कार्रवाई को बिना नोटिस और आदेश के बताया गया है। मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय करेगा और मस्जिद कमेटी ने न्यायिक प्रक्रिया एवं कानूनी प्रावधानों के पालन की मांग की है।
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सहारनपुर की सौ साल पुरानी मस्जिद के अवैध हिस्से के ध्वस्तीकरण को लेकर मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में प्रशासन की कार्रवाई को बिना नोटिस और आदेश के बताया गया है और जल्द सुनवाई की उम्मीद जताई गई है।
मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली तनवीर अहमद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी है। अधिवक्ता बाबर वसीम के अनुसार, याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने मस्जिद को बिना किसी नोटिस और सक्षम आदेश के ध्वस्त कर दिया। याचिका में वर्शिप एक्ट के उल्लंघन के साथ-साथ बिजली बिल न स्वीकार करने, गवाहों की पूरी गवाही न कराने और फाइल को बहस में लगाकर अंतिम निर्णय लेने जैसे कई कानूनी पहलुओं को चुनौती दी गई है।
मस्जिद कमेटी का कहना है कि पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट के तहत कार्रवाई से पहले वादी पक्ष को अपना स्वामित्व साबित करना होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया। सरकार और प्रशासन की ओर से स्वामित्व को उस स्तर पर साबित नहीं किया गया, जिस आधार पर कार्रवाई की गई।
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध करार देते हुए प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया था। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को भी कानूनी चुनौती के संदर्भ में रखा है।
अधिवक्ता बाबर वसीम ने बताया कि याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि ध्वस्तीकरण से पहले उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों का समुचित परीक्षण होना चाहिए था। मस्जिद कमेटी का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए था।
अब हाईकोर्ट इन दलीलों और दाखिल दस्तावेजों के आधार पर मामले की सुनवाई करेगा। मस्जिद कमेटी को उम्मीद है कि जल्द सुनवाई होगी और सभी संबंधित तथ्यों पर विचार किया जाएगा।
प्रशासन की कार्रवाई और आदेशों को चुनौती देने के साथ न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को भी याचिका में प्रमुखता से रखा गया है। अदालत की सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
याचिका के साथ संबंधित दस्तावेज भी न्यायालय में दाखिल किए गए हैं और जल्द सुनवाई की उम्मीद है
बाबर वसीम, अधिवक्ता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- याचिका में क्या न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया गया?
- मस्जिद कमेटी का कहना है कि ध्वस्तीकरण से पहले दस्तावेजों, गवाहों और साक्ष्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया।
- अब इस मामले में आगे क्या होगा?
- इलाहाबाद हाईकोर्ट याचिका की जल्द सुनवाई करेगा और सभी संबंधित तथ्यों पर विचार करेगा।
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