सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्त, ओवैसी ने संवैधानिक हक़ पर सवाल उठाए
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में करीब 120 साल पुरानी मस्जिद को अदालत के आदेश पर गिराया गया
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 120 साल पुरानी मस्जिद को अदालत के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया है। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और वक्फ संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध कब्जे के कारण और अदालत के आदेश के अनुसार की गई।
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एक नज़र में
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 120 साल पुरानी मस्जिद को शनिवार सुबह अदालत के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया।
- सहारनपुर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद को चार जेसीबी मशीनों से गिराया।
- असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिद की धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाए।
- जिला जज की अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी थी।
- सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया करीब 570 दिन की शिकायत, जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद पूरी हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सहारनपुर मस्जिद कब ध्वस्त की गई?
- सहारनपुर मस्जिद शनिवार सुबह लगभग 5 बजे अदालत के आदेश के बाद ध्वस्त की गई।
- मस्जिद ध्वस्तीकरण के पीछे क्या वजह थी?
- सिटी मजिस्ट्रेट ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के कारण मस्जिद हटाने का आदेश दिया था, जिसे अदालत ने बरकरार रखा।
- असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिद ध्वस्तीकरण पर क्या कहा?
- ओवैसी ने मस्जिद की संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता और लंबे समय से मौजूद कब्जे पर सवाल उठाए और इसे गलत बताया।
- मस्जिद की मौजूदगी को साबित करने के लिए क्या दस्तावेज पेश किए गए?
- मस्जिद कमेटी ने अदालत में वर्ष 1911 तक के दस्तावेज पेश किए थे।
- ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कब से चल रही थी?
- ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करीब 570 दिन की शिकायत, जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद पूरी हुई।
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 120 साल पुरानी मस्जिद को शनिवार सुबह लगभग 5 बजे अदालत के आदेश के बाद ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिद की लंबे समय से मौजूदगी और धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर सवाल उठाए।
सहारनपुर प्रशासन ने शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद को चार जेसीबी मशीनों से गिराया। नगर निगम के आधा दर्जन से अधिक डंपर मलबा कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर ले गए। मस्जिद कमेटी ने अदालत में वर्ष 1911 तक के दस्तावेज पेश किए थे, जिनसे मस्जिद की मौजूदगी साबित होती है। जिला जज की अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद कमेटी की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा था। इससे पहले 17 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के कारण मस्जिद हटाने और 6.41 करोड़ रुपये मुआवजे का आदेश दिया था।
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले अस्तित्व में थी और यहां एक सदी से अधिक समय से लगातार नमाज अदा की जाती रही है। उन्होंने पूछा कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी अब मुसलमानों पर लागू नहीं होती। ओवैसी ने कहा कि मस्जिद ‘वक्फ बाय यूजर’ के तहत संरक्षित वक्फ संपत्ति है और सरकार लंबे समय बाद अचानक किसी संपत्ति पर कब्जा कैसे जता सकती है। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट और लंबे समय से चले आ रहे कब्जे का हवाला देते हुए कहा कि एक सदी से अधिक समय से खुले और सार्वजनिक कब्जे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ओवैसी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘‘आप सिर्फ इसलिए हमारी मस्जिद को बुलडोज नहीं कर सकते क्योंकि आपको खुजली हो रही है। मेरी धार्मिक स्वतंत्रता आपकी दया पर निर्भर नहीं है।’’ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मस्जिद के ध्वस्तीकरण का विरोध किया और कहा कि मस्जिद वर्ष 1911 से पहले से मौजूद थी।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करीब 570 दिन की शिकायत, जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद पूरी हुई। प्रशासन ने बताया कि यह कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुरूप की गई है। विपक्षी नेताओं ने इस कदम की निंदा की है और इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
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