भरतपुर में नए चेहरे महापौर की दौड़ में, पुराने दिग्गज हारे
65 सदस्यीय निगम में 36 निर्दलीयों की जीत, 28 महिला पार्षदों के बीच महापौर चुनाव जटिल
भरतपुर नगर निगम चुनाव में 36 निर्दलीयों की जीत और 28 महिलाएँ पार्षद चुनी गईं, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। भाजपा सबसे बड़ा दल बनी है लेकिन उसके पास बहुमत नहीं है, इसलिए महापौर पद के लिए गठबंधन जरूरी होगा। चुनाव में कई पुराने दिग्गज हारे और महापौर पद के लिए नए चेहरों की संभावना बढ़ी है।
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भरतपुर। भरतपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने स्थानीय सियासत में बड़े बदलाव दिखाए हैं। 65 सदस्यीय निगम में 36 निर्दलीयों की जीत और 28 महिला पार्षदों के चुने जाने से महापौर पद के लिए पारंपरिक राजनीतिक समीकरण टूट गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अब नए चेहरे महापौर की दौड़ में हैं।
भरतपुर नगर निगम चुनाव में पुराने राजनीतिक प्रभाव को मतदाताओं ने पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। विश्लेषक राजेश खंडेलवाल के अनुसार, इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि दिग्गज कई चुनावी मैदान में धराशायी हो गए हैं और पहली बार पार्षद बनी महिलाओं ने नई राजनीतिक संभावनाओं के दरवाजे खोल दिए हैं।
महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, इसलिए 28 महिला पार्षदों में से किसी एक के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश होगी। फिलहाल व्यवसायी की पत्नी निशा अग्रवाल, डबल ए क्लास ठेकेदार की पत्नी लक्ष्मी, पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट की पत्नी विचित्रा सिंह, प्रभावशाली मिष्ठान व्यवसायी परिवार से जुड़ी अम्बिका सैनी और तीसरी बार पार्षद चुनी गईं अनुराधा सिंह के नाम चर्चा में हैं।
वार्ड संख्या 61 से अनुराधा सिंह तीसरी बार पार्षद चुनी गई हैं, जबकि उनके पति हजारी सिंह वर्ष 2004 में पार्षद रहे हैं। हजारी भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
निशा अग्रवाल के लिए यह निगम की राजनीति में पहली पारी है, लेकिन परिवार की सामाजिक और राजनीतिक पहुंच उनके नाम को चर्चा में ला रही है। लक्ष्मी भी पहली बार पार्षद बनी हैं और उनके परिवार की स्थानीय राजनीति में सामाजिक और संगठनात्मक पहुंच को देखते हुए उनका नाम महापौर की संभावित रेस में है।
पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट चुनाव हार गए, जबकि उनकी पत्नी विचित्रा सिंह जीत गईं। विचित्रा के परिवार के पास निगम की राजनीति का प्रत्यक्ष अनुभव है और उनके पति यश अग्रवाल भाजपा में अच्छी पहचान रखते हैं। अम्बिका सैनी भी पार्षद चुनी गई हैं और उनका परिवार भरतपुर का जाना-पहचाना मिष्ठान व्यवसायी परिवार है।
भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी है, लेकिन बहुमत नहीं है। 36 निर्दलीयों के समर्थन के बिना महापौर चुनाव आसान नहीं होगा। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीयों के बीच बनने वाले समीकरण अंतिम तस्वीर तय करेंगे।
वार्ड 18 में भाजपा की मीनू सिंह, जो उप महापौर गिरीश चौधरी की पत्नी हैं, चुनाव हार गईं जबकि कांग्रेस की मीनू डागुर ने जीत दर्ज की। यह परिणाम निगम के मौजूदा सत्ता तंत्र से जुड़े परिवार को अपने ही वार्ड में हार का सामना करना पड़ा।
इस चुनाव में नए नामों की चर्चा महापौर की रेस में बढ़ गई है, क्योंकि पारंपरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले कई चेहरों को हार का सामना करना पड़ा है। महापौर की कुर्सी के लिए दावेदार महिला का नाम महत्वपूर्ण होगा, लेकिन उसके पीछे खड़े पार्षदों की संख्या और अलग-अलग खेमों को साथ लाने की क्षमता सबसे बड़ा फैक्टर होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- महापौर पद के लिए किन महिलाओं के नाम चर्चा में हैं?
- निशा अग्रवाल, लक्ष्मी, विचित्रा सिंह, अम्बिका सैनी और अनुराधा सिंह महापौर पद के संभावित दावेदार हैं।
- निर्दलीयों की जीत से महापौर चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- निर्दलीयों की संख्या अधिक होने के कारण उनके समर्थन के बिना महापौर चुनाव का परिणाम तय करना मुश्किल होगा।
- पुराने दिग्गजों की हार का क्या महत्व है?
- यह बदलाव दर्शाता है कि स्थानीय मतदाता पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और नए चेहरे उभर रहे हैं।
- वार्ड 61 की पार्षद अनुराधा सिंह का राजनीतिक बैकग्राउंड क्या है?
- अनुराधा सिंह तीसरी बार पार्षद बनी हैं और उनके पति हजारी सिंह भी पहले पार्षद रह चुके हैं।
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