नेपाल-तिब्बत में भूकंप और बाढ़ से 13,583 लोग प्रभावित
भोटे कोशी बाढ़ में 5,326 लापता, तिब्बत में 43 मौतें, राहत अभियान जारी
नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ और 8 सितंबर को आए भूकंप से 13,583 लोग प्रभावित हुए हैं। नेपाल और तिब्बत में बचाव अभियान जारी है, जिसमें कई लोग सुरक्षित बचाए गए हैं जबकि हजारों अभी भी लापता हैं। तिब्बत में भूकंप से कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है और राहत कार्य जारी है।
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नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का कहर जारी है। तिब्बत में आए भूकंप से 43 लोगों की मौत हुई है।
भोटे कोशी बाढ़ और राहत कार्य
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा था, जिससे भोटे कोशी नदी में पानी, बर्फ और मलबे का सैलाब आया। इस बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। सड़कें, पुल, मकान और हाइड्रोपावर परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
नेपाल सरकार के मुताबिक, रासुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई जिलों में राहत और बचाव अभियान जारी है। 8 सितंबर को जारी सरकारी अपडेट के अनुसार आपदा के 14वें दिन भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहे थे।
इनमें स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 13,583 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है और हजारों घायलों का इलाज किया जा रहा है।
रेस्क्यू टीमों का खास ध्यान उन लोगों को तलाशने पर है जो बाढ़ और मलबे के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंस गए हैं। कई सुरंगें मिट्टी और मलबे से भर गई हैं, जिससे अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर ऑक्सीजन और विशेष उपकरणों की मदद से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
तिब्बत में भूकंप और प्रभाव
8 सितंबर 2026 की देर रात करीब 9 बजकर 38 मिनट पर नेपाल और तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सिस्मोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक, तिब्बत में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया, जो जमीन के भीतर करीब 35 किलोमीटर की गहराई में था।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया कि नेपाल में 5.0 तीव्रता का भूकंप रात 9:53 बजे आया। इस भूकंप की गहराई ज्यादा होने के कारण सतह पर ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। अगर यह भूकंप जमीन के 5 या 10 किलोमीटर नीचे आता तो इमारतों को भारी नुकसान हो सकता था।
चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा से चीन नियंत्रित तिब्बत में कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक लोग लापता हैं।
भूकंप के झटकों से नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों में खौफ का माहौल बन गया। खासकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ जिलों में हल्के झटके महसूस किए गए। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सोशल मीडिया पर झटकों की जानकारी साझा की गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत क्षेत्र दो बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव की वजह से भूकंप के लिए संवेदनशील है।
पहले की आपदाएं और वर्तमान स्थिति
नेपाल-तिब्बत का यह हिमालयी क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ की तबाही अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
नेपाल सरकार और राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी रखे हुए हैं।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी लगातार इस क्षेत्र में नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह के आफ्टरशॉक का समय पर पता लगाया जा सके।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भोटे कोशी बाढ़ में अब तक 1,357 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 5,326 लोग अब भी लापता हैं।
सरकारी अधिकारी, नेपाल सरकार
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.0 मापी गई।
अधिकारी, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भोटे कोशी बाढ़ के प्रभावित इलाकों में राहत कार्य कैसे जारी हैं?
- राहत कार्य में स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, और बचाव टीमें हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को ऑक्सीजन और विशेष उपकरणों की मदद से खोज रही हैं।
- भूकंप के बाद नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
- नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी इस क्षेत्र में लगातार नजर रखे हुए है ताकि किसी भी तरह के आफ्टरशॉक का समय पर पता लगाया जा सके।
- क्या इस क्षेत्र में आने वाले समय में और आपदाओं का खतरा है?
- यह क्षेत्र दो बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण भूकंप के प्रति संवेदनशील है, इसलिए आगे भी भूगर्भीय गतिविधियों का खतरा बना रहेगा।
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