मुंगेर के राहत शिविरों में सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत
बाढ़ के बीच 24 घंटे का कठिन उपवास कर पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना
मुंगेर के बाढ़ प्रभावित राहत शिविरों में रहने वाली महिलाओं ने 14 सितंबर को हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा और पति की दीर्घायु व परिवार की सुख-शांति की कामना की। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पूजा-अर्चना की और व्रत के नियमों का पालन किया।
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महेशपुर। मुंगेर के बाढ़ प्रभावित राहत शिविरों में रहने वाली महिलाओं ने 14 सितंबर को हरितालिका तीज का 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार के कुशलक्षेम के लिए पूजा-अर्चना की।
मुंगेर के दियारा इलाके के सीताचरण और जाफरनगर गांव की सैकड़ों विस्थापित महिलाएं बबुआ घाट और जिला स्कूल के राहत शिविरों में तिरपाल के नीचे दिन बिता रही हैं। यहां न रहने का स्थायी ठिकाना है, न स्नान की पूरी व्यवस्था और न ही पूजा के लिए एकांत स्थान। इसके बावजूद महिलाओं की आस्था अडिग रही।
सुहागिनों ने सुबह से ही बबुआ घाट पर पूजा की तैयारी शुरू कर दी थी। किसी के हाथ में बाढ़ से बचाई गई टूटी-फूटी पूजा थाली थी, तो कोई गीले कपड़ों के बीच बची पूजन सामग्री समेटकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना में जुटी थी।
सीताचरण की मनीषा कुमारी ने बताया कि घर में कमर तक पानी भर जाने पर वे बच्चों और सामान के साथ बबुआ घाट आ गईं। हर साल घर पर तीज मनाने वाली मनीषा ने कहा, "यहां न नहाने की जगह है, न पूजा का सामान सुरक्षित रखने का ठिकाना। दिनभर बिना अन्न-जल के रहना है और घर की बर्बादी की चिंता भी सता रही है। मन भारी है, लेकिन पति के लिए यह व्रत छोड़ नहीं सकते।"
जिला स्कूल के शिविर में रह रहीं जाफरनगर की रीना देवी ने बताया कि घर में तीज पूजा का सामान बाढ़ में नष्ट हो गया। उन्होंने कहा, "राहत शिविर में साफ-सफाई की कमी है और सैकड़ों लोगों के बीच व्रत की मर्यादा निभाना चुनौतीपूर्ण है। मन बार-बार डूबे घर और मवेशियों की चिंता में लगा रहता है। फिर भी पति की लंबी उम्र की कामना से पीछे नहीं हटे।"
बबुआ घाट पर शरण लिए सुनीता देवी और कोमल कुमारी ने कहा कि बाढ़ ने घर-द्वार छीन लिया, लेकिन ईश्वर पर भरोसा नहीं छीना। वे कहती हैं, "भूखे-प्यासे रहकर ऐसी अमानवीय परिस्थितियों में उपवास करना बेहद पीड़ादायक है। खाने-पीने से लेकर बच्चों की सुरक्षा की चिंता है। फिर भी पूरा विश्वास है कि भगवान शिव और माता पार्वती हमारे संकट को जल्द हरेंगे, गंगा का पानी उतरेगा और हम अपने आशियाने लौट सकेंगे।"
पुरोहित ललित तिवारी ने बताया कि भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 सितंबर को थी। सूर्योदय तृतीया तिथि में होने के कारण उदयातिथि के अनुसार 14 सितंबर को ही हरितालिका तीज का व्रत और पूजा मनाई गई। तीज व्रती सुबह से शाम तक मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे।
सुहागिनों ने भगवान शिव-पार्वती की पूजा कर सोलह श्रृंगार, फल-फूल, धूप-दीप, चंदन और अक्षत अर्पित किया। मान्यता है कि इस व्रत से दांपत्य जीवन में प्रेम, मधुरता और सौभाग्य बढ़ता है। व्रत का पारण 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद किया जाएगा, तब व्रती जल या जूस ग्रहण कर उपवास खोलेंगी।
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