जदयू यूपी में मजबूत बूथ वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगी
गठबंधन का फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा, संगठन विस्तार पर जोर
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में केवल उन सीटों पर चुनाव लड़ेगी जहां उसका बूथ स्तर पर संगठन मजबूत है। साथ ही, बीजेपी भी 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद अपने बूथों को मजबूत करने के लिए तैयारियां कर रही है।
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जनता दल यूनाइटेड ने अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी उन सीटों पर प्रत्याशी उतारने की योजना बना रही है जहां उसका बूथ स्तर पर संगठन मजबूत है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में शनिवार को जदयू की ओर से मंडलीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में यूपी जदयू प्रभारी और बिहार के ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि पार्टी हर सीट पर चुनाव लड़ने के बजाय संगठनात्मक रूप से मजबूत क्षेत्रों पर फोकस करेगी। उन्होंने कहा, "जिन विधानसभा सीटों पर जदयू की बूथ कमेटियां मजबूत हैं, उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की जाएगी।"
श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि किस दल के साथ गठबंधन होगा, इसका फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने बताया कि बनारस में 24, 25 या 26 तारीख में से किसी एक दिन प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम प्रस्तावित है।
जदयू अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल ने चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं से बूथ लेवल कमेटियां तैयार करने का आह्वान किया है। पार्टी संगठन को मजबूत करने और सदस्यता अभियान को तेज करने पर जोर दे रही है। मंडलीय सम्मेलनों के जरिए कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों के लिए सक्रिय किया जा रहा है।
बीजेपी ने भी बूथ स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी की नजर उन 18 हजार 900 बूथों पर है जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर तक प्रदेश के दौरे पर रहेंगे और पिछली हार वाले क्षेत्रों पर खास फोकस करेंगे।
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश से बड़ा झटका लगा था। पार्टी ने 2019 में 62 सीटें जीती थीं, जबकि 2024 में केवल 33 सीटें ही जीत पाई। समाजवादी पार्टी ने अपनी सीटें बढ़ाकर 37 कर लीं। बीजेपी को ग्रामीण इलाकों में करीब 80 फीसदी बूथों पर बढ़त गंवानी पड़ी। अवध और पूर्वांचल में पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
2022 के विधानसभा चुनाव में अवध क्षेत्र की 154 सीटों में से बीजेपी ने 101 सीटें जीती थीं, जबकि पूर्वांचल की 102 सीटों में से 53 सीटें पार्टी के खाते में गई थीं। हालांकि, अयोध्या, फैजाबाद, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे इलाकों में पार्टी को नुकसान हुआ। पूर्वांचल में गैर-ओबीसी वोटों का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर शिफ्ट हुआ, जिसका असर जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और प्रयागराज में भी दिखा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड की 128 सीटों में से बीजेपी ने 2022 में 87 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी केवल 65 सीटों पर बढ़त बना पाई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जदयू यूपी विधानसभा चुनाव में किस आधार पर सीटें चुनेगी?
- जदयू बूथ स्तर पर मजबूत संगठन वाले क्षेत्रों पर फोकस करेगी, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
- जदयू ने चुनाव जीतने के लिए क्या तैयारी शुरू की है?
- पार्टी बूथ स्तर पर कमेटियां तैयार कर रही है और सदस्यता अभियान तेज कर रही है।
- बीजेपी यूपी में किस प्रकार की रणनीति अपना रही है?
- बीजेपी पिछली लोकसभा चुनाव में हार वाले ज्यादातर बूथों पर विशेष ध्यान दे रही है और प्रदेश दौरे की योजना बना रही है।
- 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में नुकसान क्यों हुआ?
- ग्रामीण इलाकों में करीब 80% बूथों पर बढ़त गंवाने और अवध-पूर्वांचल क्षेत्र में वोटों के शिफ्ट होने से नुकसान हुआ।
- जदयू गठबंधन के संबंध में क्या जानकारी मिली है?
- गठबंधन का फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया जाएगा, फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है।
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