सीकर में 701 कलशों के साथ गणेश महोत्सव का भव्य शुभारंभ
शोभायात्रा सांवलियाजी चौराहा से निकली, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया
सीकर में 11 दिवसीय गणेश महोत्सव का शुभारंभ 701 कलशों की शोभायात्रा के साथ हुआ, जो सांवलियाजी चौराहा से शुरू होकर प्रजापत मोहल्ला तक गई। महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की, भंडारा किया गया और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। गणपति स्थापना से लेकर समापन तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
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सीकर। सीकर में 11 दिवसीय गणेश महोत्सव का विधिवत शुभारंभ 701 कलशों की शोभायात्रा के साथ हुआ। यह यात्रा सांवलियाजी चौराहा से शुरू होकर उदयपुर-मंगलवाड़ मार्ग से प्रजापत मोहल्ला पहुंची। रास्ते में ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर कलश रखकर भक्ति गीतों पर नाचती रहीं और डीजे की धार्मिक धुनों पर महिला-पुरुष थिरकते दिखे। यह यात्रा गणपति चौक पहुंचकर शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से गणपति जी की स्थापना के साथ समाप्त हुई। कस्बे के अलग-अलग मंदिरों पर लाइट डेकोरेशन किया गया है।
बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शोभायात्रा में शामिल हुए। करीब 15 आकार की रूई से बनी ‘सिरोहीचा राजा’ की गणपति प्रतिमा विशेष आकर्षण रही।
सदर बाजार से शुरू हुई शोभायात्रा प्रमुख मार्गों से होते हुए रामझरोखा पहुंची, जहां संध्या आरती हुई। ग्राम सुराणी धाम में बाबा फक्कड़नाथ महाराज और बाबूदास महाराज के सानिध्य में निर्भय दास महाराज का भंडारा आयोजित हुआ।
लक्ष्मणगढ़ कस्बे के सर्वसिद्धि विनायक गणेश मंदिर में 11 दिवसीय गणेश जन्मोत्सव का भव्य समापन भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा बस स्टैंड, चौपड़ बाजार, मुरली मनोहर जी का मंदिर, पक्की प्याऊ, कबूतरिया कुआं, खाटू की कुईं, पोस्ट ऑफिस, बेड़िया गेस्ट हाउस और घंटाघर होते हुए पुनः गणेश मंदिर पहुंची।
मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। विभिन्न शिक्षण संस्थानों की झांकियां, भजन मंडलियां, ढप मंडली, बैंड, डीजे, शिव तांडव, शिव बारात और राधा-कृष्ण रास की झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
रविवार को मंदिर में छप्पन भोग की भव्य झांकी सजाई गई। रात में मंदिर परिसर में महंत दिलीपदास महाराज और पुजारी मनोहर पुजारी के सानिध्य में विशाल जागरण का आयोजन हुआ।
गणेश चतुर्थी की सुबह विद्वान पंडितों के आचार्यत्व में भगवान गणपति का दुग्धाभिषेक, दूर्वाभिषेक, 1008 लड्डुओं से अभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया गया। दोपहर में गणेश जी महाराज की कथा का आयोजन हुआ। सुबह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की।
नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के साथ ही 11 दिवसीय गणेश जन्मोत्सव समारोह का विधिवत समापन हुआ। पुलिस चौकी चिकारड़ा की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। गणपति स्थापना से विसर्जन तक हर दिन अलग-अलग श्रद्धालु प्रसाद वितरण कराएंगे।
अध्यक्ष उदयलाल गुर्जर ने बताया, "शोभायात्रा सांवलियाजी चौराहा से शुरू हुई।"
शोभायात्रा का समय
शोभायात्रा सुबह 8:15 बजे शुरू हुई और दोपहर 12:15 बजे समाप्त हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शोभायात्रा किस मार्ग से गुजरी?
- यह यात्रा उदयपुर-मंगलवाड़ मार्ग से प्रजापत मोहल्ला पहुंची और सदर बाजार से रामझरोखा तक गई।
- गणेश महोत्सव के दौरान कौन-कौन से धार्मिक आयोजन हुए?
- मंदिर में छप्पन भोग की झांकी, विशाल जागरण और विभिन्न प्रकार के अभिषेक जैसे दुग्धाभिषेक, दूर्वाभिषेक और पंचामृत अभिषेक हुए।
- गणेश महोत्सव में सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी?
- पुलिस चौकी चिकारड़ा की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
- गणपति स्थापना से विसर्जन तक किस तरह का आयोजन होता है?
- हर दिन अलग-अलग श्रद्धालु प्रसाद वितरण कराएंगे।
- शोभायात्रा में किन सांस्कृतिक झांकियों और कार्यक्रमों ने आकर्षित किया?
- विभिन्न शिक्षण संस्थानों की झांकियां, भजन मंडलियां, ढप मंडली, बैंड, डीजे और राधा-कृष्ण रास की झांकियां लोगों का मन मोह गईं।
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