बैंक कर्मचारी 11 सितंबर से तीन दिन हड़ताल पर रहेंगे
मांगें न मानीं तो सितंबर के अंत में तीन दिन फिर हड़ताल का ऐलान
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की अपील पर बैंक कर्मचारी 11 से 13 सितंबर तक हड़ताल पर रहेंगे, जिससे बैंक सेवाएं प्रभावित होंगी। मुख्य मांगें पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना और स्केल-IV से ऊपर के अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना को वापस लेना हैं। यदि इन मांगों पर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो 28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल होगी।
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की अपील पर बैंक कर्मचारी 11 सितंबर को अपनी प्रमुख मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। इससे लगातार तीन दिन बैंक बंद रहेंगे। अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो 28 से 30 सितंबर तक फिर तीन दिन हड़ताल होगी।
बैंक यूनियनों की मुख्य मांग पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना और स्केल-IV व उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजना को वापस लेना है। बैंककर्मियों ने मंगलवार को आल इंडिया डिमांड्स डे मनाया।
मध्य प्रदेश में सितंबर महीने में आठ दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहेगा। 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर रहेंगे, जबकि शनिवार-रविवार की छुट्टियों के कारण 7,000 शाखाएं लगातार तीन दिन और फिर पांच दिन कामकाज प्रभावित होगा। इस दौरान कैश जमा-निकासी और चेक क्लियरेंस जैसी जरूरी सेवाएं अटक सकती हैं।
अभी बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है। यूनियनों की मांग है कि हर शनिवार को छुट्टी घोषित कर पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाए। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कामकाज का समय 40 मिनट बढ़ाने का प्रस्ताव है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 11 सितंबर और 28 से 30 सितंबर तक राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया है। अगर सरकार और बैंक संगठनों के बीच प्रस्तावित बातचीत से मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो हड़ताल जारी रहेगी।
यूनियंस के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की जायज मांग को सरकार अनावश्यक रूप से लंबित कर रही है। पीएलआइ योजना का मुद्दा सुलह प्रक्रिया के सामने लंबित है, लेकिन सरकार ने स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए एकतरफा और भेदभावपूर्ण योजना लागू कर दी है।
यूनियंस का आरोप है कि नई पीएलआइ योजना बैंक कर्मचारियों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास है और इसके जरिए अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को अनुपातहीन रूप से अधिक प्रोत्साहन राशि मिल रही है। साथ ही सरकार व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन की नीति को आगे बढ़ा रही है।
पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, एनपीएस को ओपीएस में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान महंगाई भत्ते की मांगें भी लंबित हैं। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में क्लर्क, सब-स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती की मांग भी पूरी नहीं हुई है। ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत सीमा बढ़ाने की मांग पर भी समाधान नहीं हुआ है।
यूनियंस का कहना है कि इन मुद्दों का समाधान किए बिना सरकार अगले वेतन संशोधन समझौते को जल्द पूरा करने का प्रयास कर रही है।
सरकार और बैंक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में बुधवार को बैठक प्रस्तावित है। मांगों पर सकारात्मक बातचीत नहीं हुई तो हड़ताल जारी रखने का फैसला किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बैंक हड़ताल की मुख्य मांगें क्या हैं?
- मांगों में पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, एनपीएस को ओपीएस में बदलना और समान महंगाई भत्ते की मांग भी शामिल है।
- पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह का क्या प्रस्ताव है?
- हर शनिवार को छुट्टी का प्रस्ताव है, इसके बदले सोमवार से शुक्रवार कामकाज का समय 40 मिनट बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।
- नई पीएलआइ योजना पर यूनियंस का क्या आरोप है?
- यूनियंस का कहना है कि यह योजना बैंक कर्मचारियों के बीच विभाजन कर रही है और केवल अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को ज्यादा प्रोत्साहन देती है।
- सरकार और बैंक संगठनों के बीच अगली बातचीत कब होगी?
- नई दिल्ली में बुधवार को सरकार और बैंक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक प्रस्तावित है।
- हड़ताल किस स्थिति में जारी रहेगी?
- अगर सरकार और बैंक संगठनों के बीच प्रस्तावित बातचीत से मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो हड़ताल जारी रहेगी।
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