कांग्रेस ने चिह्नित की 70 कमजोर विधानसभा सीटें
2028 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने शुरू किया घर-घर मतदाता सूची सत्यापन अभियान
मध्य प्रदेश में 2028 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने 70 कमजोर प्रदर्शन वाली सीटें चिन्हित कर घर-घर मतदाता सूची सत्यापन अभियान शुरू किया है। पार्टी ने इन क्षेत्रों में बड़े नेताओं को जिम्मेदारी देते हुए मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की योजना बनाई है। वहीं भाजपा भी 35 चुनौतीपूर्ण सीटों पर माइक्रो-प्लानिंग कर रही है।
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मध्य प्रदेश में 2028 विधानसभा चुनाव से लगभग दो वर्ष पहले कांग्रेस ने 70 ऐसी विधानसभा सीटें चिह्नित की हैं, जहां उसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। पार्टी ने इन क्षेत्रों में घर-घर मतदाता सूची का सत्यापन अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. संजय कामले ने बताया कि पार्टी ने 70 विधानसभा सीटें चिन्हित की हैं, जिनमें प्रदर्शन कमजोर रहा है। इनमें वे सीटें शामिल हैं जहां कांग्रेस कभी नहीं जीती या बहुत कम बार जीत पाई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 230 सीटों में से कांग्रेस को 66 सीटें मिली थीं।
पार्टी ने इन कमजोर सीटों पर घर-घर मतदाता सूची सत्यापन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत मतदाताओं के नाम, फोन नंबर सहित उनकी जानकारी संकलित की जाएगी ताकि उनसे संपर्क किया जा सके।
डॉ. कामले ने बताया कि इन विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी बड़े नेताओं को दी जाएगी। चार-चार गांवों का क्लस्टर बनाकर एक प्रभारी नियुक्त किया जाएगा, जो कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने का प्रयास करेगा।
भाजपा भी 35 चुनौतीपूर्ण सीटों पर माइक्रो-प्लानिंग कर रही है। पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में भाजपा ने मंत्रियों की तैनाती भी इन कठिन सीटों पर की है। संगठन के दिग्गज मंत्रियों और कोर ग्रुप के सदस्यों को प्रभारी बनाया गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा जीत सकें।
कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती वाली सीटों में भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट शामिल है, जहां 1980 से भाजपा का कब्जा है। यहां पहले बाबूलाल गौर और पिछले दो बार से उनकी बहू कृष्णा गौर विधायक हैं। सागर की रहली विधानसभा सीट से भाजपा के गोपाल भार्गव 1985 से लगातार जीत रहे हैं।
सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से भाजपा सिर्फ दो बार जीत पाई है। वहीं, कसरावद भीकनगांव में 2013 से लगातार कांग्रेस जीती है और बड़वानी के राजपुर से बाला बच्चन लगातार तीन बार से विधायक हैं।
इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस पार्टी इन कमजोर सीटों पर विशेष फोकस करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कांग्रेस किस तरह का अभियान शुरू करेगी कमजोर सीटों पर?
- कांग्रेस घर-घर मतदाता सूची का सत्यापन करके मतदाताओं की जानकारियां इकट्ठा करेगी।
- कमजोर विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी?
- इन क्षेत्रों के लिए बड़े नेताओं को प्रभारी बनाया जाएगा जो चार-चार गांवों का क्लस्टर सम्भालेंगे।
- भाजपा का उद्देश्य इन चुनौतीपूर्ण सीटों पर क्या है?
- भाजपा का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है।
- गोविंदपुरा सीट पर कांग्रेस की स्थिति कैसी है?
- गोविंदपुरा सीट पर 1980 से भाजपा का कब्जा है, कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है।
- राहुल गांधी के दौरे का मकसद क्या होगा?
- राहुल गांधी का दौरा कांग्रेस की कमजोर विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस बढ़ाने के लिए होगा।
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