नांदिया में दो दिवसीय नमामि मात महोत्सव का आयोजन
धार्मिक, सांस्कृतिक और ग्रामीण परंपराओं से जुड़ा कार्यक्रम हुआ संपन्न
जालौर जिले के बागोड़ा के नांदिया गांव में दो दिवसीय नमामि मात महोत्सव आयोजित हुआ, जिसमें ग्रामीण संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने वाले विविध कार्यक्रम शामिल थे। महोत्सव में धार्मिक, सांस्कृतिक, और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं तथा पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता पर भी संदेश दिए गए। आयोजन के दौरान प्रतिभाओं का सम्मान किया गया और पारंपरिक खेती तथा ग्रामीण जीवन की जानकारी साझा की गई।
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जालोर। जालोर जिले के बागोड़ा के नांदिया गांव में दो दिन तक चलने वाला नमामि मात नांदिया महोत्सव संपन्न हुआ। इस आयोजन में ग्रामीण संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने वाले कई कार्यक्रम हुए। मुख्य अतिथि उद्यमी और कवयित्री मंजू बहन लोढ़ा ने ग्रामीण संस्कृति को समाज की अनमोल धरोहर बताया।
मातृभक्त मुरारदान स्मृति सेवा संस्थान की ओर से जन्माष्टमी और विसर्जन दिवस पर आयोजित इस महोत्सव में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शोभायात्रा, दीपोत्सव, कृष्ण लीला, सामूहिक गरबा, लोकनृत्य और मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं महोत्सव की मुख्य आकर्षण रहीं।
विसर्जन के दिन मूर्ति स्थापना, मेहमानों का स्वागत, ऊंट दौड़, ग्रामीण और पारंपरिक खेल तथा गैर-गरबा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। सांस्कृतिक संध्या में लोक गायक जमीन खान और गायिका रिंकल ने लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिस पर दर्शक झूम उठे और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
महोत्सव में सामूहिक स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। मातृशक्ति सम्मान, मातृभूमि वंदन, पर्यावरण संरक्षण और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे संदेश भी दिए गए। ग्रामीण मेले में झूले, हाट-बाजार और बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्था की गई।
इस दौरान पारंपरिक, जैविक और आधुनिक खेती की जानकारी दी गई और ग्रामीण जीवन तथा कृषि संस्कृति को प्रदर्शित किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया।
आयोजक सरपंच हिंगलाज और गांव के सभी लोगों ने मुख्य अतिथि मंजू बहन लोढ़ा, लोक कलाकारों, मेहमानों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मंजू बहन ने कहा, "ग्रामीण संस्कृति हमारी पहचान और जड़ों की ताकत है।" उन्होंने बताया कि गांवों में आज भी आपसी प्रेम, भाईचारा और साथ मिलकर काम करने की भावना समाज को प्रेरणा देती है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी मिट्टी और परंपराओं से जोड़ते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नमामि मात महोत्सव का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- यह महोत्सव ग्रामीण संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया था।
- महोत्सव में कौन-कौन से खेल और प्रतियोगिताएं हुईं?
- विसर्जन दिवस पर ऊंट दौड़, पारंपरिक खेल और मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
- महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या संदेश दिये गए?
- मातृभूमि वंदन, पर्यावरण संरक्षण और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे संदेश महोत्सव में साझा किए गए।
- महोत्सव में प्रतिभाओं को कैसे सम्मानित किया गया?
- अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करके उनकी उपलब्धियों को सराहा गया।
- मुख्य अतिथि मंजू बहन लोढ़ा ने क्या विशेष बात कही?
- उन्होंने ग्रामीण संस्कृति को हमारी पहचान बताया और कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी मिट्टी से जोड़ते हैं।
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