सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लॉ स्टूडेंट्स पर कार्रवाई यूनिवर्सिटी का अधिकार
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश को रद्द करते हुए कोर्ट ने छात्रों के व्यवहार नियंत्रित करने का अधिकार न होने का फैसला सुनाया
सुप्रीम कोर्ट ने नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि लॉ स्टूडेंट्स के अनुशासनात्मक मामलों में कार्रवाई का अधिकार सिर्फ संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान को है। कोर्ट ने BCI द्वारा छात्रों के वकील के रूप में नामांकन को रोकने के आदेश पर नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में BCI की दखलंदाजी अनुचित थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ स्टूडेंट्स के व्यवहार को नियंत्रित करने या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार केवल संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान के पास है।
मामले का背景 और विवाद
नालसार के करीब 450 छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। यह नाराजगी CJI की जुलाई में पुलिस कार्रवाई से जुड़ी एक टिप्पणी को लेकर थी। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर निमंत्रण वापस लेने की मांग की। इसके बाद BCI ने 13 अगस्त को सभी राज्य बार काउंसिलों को 2026 बैच के नालसार ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेश
14 अगस्त को सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI के मामले में दखल देने पर नाराजगी जताई और कहा कि छात्रों का विरोध संवैधानिक मूल्यों पर आधारित था। कोर्ट ने यह भी कहा कि लॉ स्टूडेंट्स के अनुशासन का मामला उनके संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान के अधिकार क्षेत्र में आता है।
BCI के आदेश पर प्रतिक्रिया और वापसी
BCI ने विवाद बढ़ने के बाद अपने आदेश को कुछ ही घंटों में वापस ले लिया और सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी। BCI ने कहा कि कानून के छात्रों से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है और कुछ शिक्षकों पर छात्रों को उकसाने का आरोप भी लगाया था।
विशेषज्ञों और प्रभावितों के विचार
एक सीनियर वकील ने कहा कि यह मामला याचिका के स्तर तक पहुंच चुका है। एडवोकेट परमेश्वर ने कहा कि BCI चेयरमैन के निर्देश वापस ले लिए गए हैं, लेकिन उनकी जांच होनी चाहिए कि ये आदेश किस कानूनी प्रावधान के तहत जारी किए गए थे। एक छात्र ने कहा, "हम सीजेआई के पद का सम्मान करते हैं लेकिन हमें संविधान और संवैधानिक मूल्यों के बारे में सिखाया गया है और हम ऐसी किसी चीज का समर्थन नहीं करना चाहते जो उन मूल्यों के खिलाफ हो।"
जब तक छात्र वकील नहीं बन जाते, तब तक बार काउंसिल अपने नियमों के तहत उन पर एक्शन नहीं ले सकती
सुप्रीम कोर्ट
NALSAR के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं
बार काउंसिल ऑफ इंडिया
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