सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती विवाद में 8 याचिकाएं संकलित की
आरक्षित वर्ग के 60-65 फीसदी अंक वाले उम्मीदवारों को जनरल माइग्रेशन का लाभ नहीं मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आठ याचिकाओं को संकलित कर सुनवाई शुरू की है। कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के 60 से 65 फीसदी अंक पाने वाले उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में माइग्रेशन का लाभ न देने और क्षैतिज आरक्षण लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नई मेरिट सूची बनाने का भी आदेश दिया गया है।
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संजोग मिश्र। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती में आठ तरह के विवादों को संकलित कर सुनवाई शुरू की है। कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के 60 से 65 फीसदी अंक पाने वाले उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में माइग्रेशन का लाभ न देने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने याचिकाओं को श्रेणीवार संकलित करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से आठ वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सुविधा संकलन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ दायर की गई हैं।
कोर्ट ने कहा कि 60 फीसदी से 65 फीसदी अंक पाने वाले आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल माइग्रेशन का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही, जो रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जनरल मेरिट में आते हैं, उन्हें जनरल कैटेगरी में ही गिना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि क्षैतिज आरक्षण जैसे महिला, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और ट्रांसजेंडर को हर जाति के भीतर मौका दिया जाएगा। इस मामले में कुल आठ प्रकार के विवादों का निपटारा किया जाएगा, जिनमें दोहरा आरक्षण, उत्तरकुंजी अंक, ईडब्ल्यूएस आरक्षण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
इस बीच, 5 जनवरी 2022 को जारी 6800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों की सूची पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को रद्द करते हुए नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुनवाई किस न्यायाधीशों की खंडपीठ ने शुरू की?
- न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने मामलों की सुनवाई शुरू की।
- आरक्षित वर्ग के कौन से उम्मीदवार जनरल कैटेगरी में गिने जाएंगे?
- आरक्षित उम्मीदवार जो जनरल मेरिट में आते हैं, उन्हें जनरल कैटेगरी में गिना जाएगा।
- हाईकोर्ट की रोक पर क्या हुआ फैसला?
- डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को रद्द कर नई मेरिट लिस्ट बनाने का निर्देश दिया।
- याचिकाएं किस आदेश के खिलाफ दायर हुईं?
- याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ दायर की गईं।
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