सुप्रीम कोर्ट ने जजों के लिए नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन की मांग पर जवाब मांगा
कपिल सिब्बल ने विलय के संवैधानिक सवाल पर देरी पर सवाल उठाए, डीपफेक मामले में गुजरात हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन (NJPC) के गठन पर जवाब मांगा है और कहा है कि न्यायिक अधिकारियों का वेतन ढांचा कार्यपालिका से अलग होना चाहिए। महाराष्ट्र स्टेट जजेज एसोसिएशन ने NJPC के गठन और उसकी पुनर्गठन की मांग की है, जबकि सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने विलय से जुड़े संवैधानिक सवालों पर कोर्ट की देरी पर प्रश्न उठाए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन (NJPC) के गठन पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों का वेतन ढांचा अलग होना चाहिए और ज्यूडिशियरी की तुलना कार्यपालिका से नहीं की जा सकती। इस बीच, कपिल सिब्बल ने विलय से जुड़े संवैधानिक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की देरी पर सवाल उठाए।
नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन की मांग
महाराष्ट्र स्टेट जजेज एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NJPC के गठन की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारियों की सैलरी, भत्ते और सेवा शर्तें स्वतंत्र आयोग के माध्यम से तय होनी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब वेतन आयोग बनाए जाएं, तो न्यायिक अधिकारियों के वेतन पर विशेष ध्यान दिया जाए। 1993 के रिव्यू फैसले के बाद 1996 में शेट्टी कमेटी बनी थी, लेकिन 1996 में पांचवें सेंट्रल पे कमीशन को भेजे गए रेफरेंस को हटा दिया गया। केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह NJPC को 18 महीनों के भीतर रिपोर्ट सौंपे और तीन महीनों में सिफारिशें लागू करे। एसोसिएशन ने हर 10 साल में NJPC के पुनर्गठन की भी मांग की है।
विलय के संवैधानिक सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की देरी
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की 10वीं अनुसूची के तहत विलय से जुड़े अपवाद पर फैसले में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राज्य सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकसभा में भी संख्या बल बदलने के लिए इसका इस्तेमाल हो सकता है। सिब्बल ने चेतावनी दी कि विलय को मान्यता देने से दलबदल विरोधी कानून का मंसूबा प्रभावित होगा और यह संवैधानिक संकट पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र और दलबदल विरोधी कानून के लिए यह महत्वपूर्ण मुद्दा 2022 से अनसुलझा पड़ा है।
डीपफेक कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट की जनहित याचिका की कार्यवाही पर रोक लगा दी है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने डीपफेक फोटो और वीडियो के गलत इस्तेमाल के खिलाफ व्यापक विनियमन की मांग की गई थी। केंद्र सरकार की याचिका पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा कि अन्य उच्च न्यायालयों में भी ऐसे मामलों की जांच चल रही है। गुजरात हाई कोर्ट ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डीपफेक कंटेंट रोकने के उपायों पर जवाब मांगा था।
केंद्र शासित प्रदेशों में अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के लिए विशेष वेतन आयोग की आवश्यकता है। ज्यूडिशियरी की तुलना एग्जीक्यूटिव से नहीं की जा सकती और उसका अपना पे स्ट्रक्चर होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट, फैसले में
विधायी दलों के विलय को मान्यता देने से गड़बड़ी होगी। तब दसवीं अनुसूची एक ऐसा कानून बन जाती है, जो अकेले दल बदलने वाले को दंडित करती है और संगठित रूप से दल बदलने वालों को पुरस्कृत करती है।
कपिल सिब्बल, सीनियर वकील
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन (NJPC) गठन के लिए आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
- केंद्र सरकार को NJPC गठन के लिए 18 महीनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी, और तीन महीनों में उसकी सिफारिशें लागू करनी हैं।
- विलय से जुड़े संवैधानिक सवालों पर सुप्रीम कोर्ट की देरी से क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- इस देरी के कारण दलबदल विरोधी कानून के मंसूबे पर असर पड़ सकता है और संवैधानिक संकट पैदा होने का खतरा है।
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