नोएडा डीएम मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के 5 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द, मुआवजे का आदेश विवाद में
गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत को अवैध मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के 5 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया था। यह मामला नागरिक अधिकारों और NSA के दुरुपयोग से संबंधित है।
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गौतमबुद्ध नगर। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 5 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की 24 वर्षीय छात्रा आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को अवैध माना था और मुआवजा जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला और मुआवजे का आदेश
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निरूद्ध आदेश रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने पाया कि आकृति की हिरासत संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन थी। अदालत ने राज्य सरकार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया, जो सरकारी खजाने से नहीं बल्कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूल किया जाएगा। इस राशि में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम भी शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि NSA जैसे कड़े निवारक निरोध कानूनों का इस्तेमाल किसी नागरिक को सामान्य जमानत के अधिकार से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता। जांच में पाया गया कि पुलिस और जिला प्रशासन ने आकृति पर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या वीडियो फुटेज नहीं था। अदालत ने यह भी नोट किया कि आकृति को 11 अप्रैल को हिरासत में लिया गया था जबकि हिंसा 13 अप्रैल को हुई, इसलिए उस हिंसा के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन की कार्रवाई को मनमाना बताया और कहा कि नोटिस गिरफ्तारी के बाद तैयार की गई महज औपचारिकता थी। प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करने वाले थाना प्रभारी और अन्य पुलिस अधिकारियों से भी मुआवजा वसूलने का आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। इस मामले की सुनवाई अब सर्वोच्च न्यायालय में होगी।
सुप्रीम कोर्ट में इस चुनौती के दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने चीफ जस्टिस की बेंच के सामने इस मामले को प्रस्तुत किया। इस विवाद में मुआवजे की राशि को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ पक्ष 5 लाख रुपये को कम मानते हुए 20 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से 5 लाख रुपये का आदेश दिया था।
NSA हिरासत और मामला
आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत को अवैध करार देते हुए आरोपों को रद्द कर दिया।
यह मामला नागरिक अधिकारों और कड़े कानूनों के दुरुपयोग से जुड़ा है।
यदि राज्य की मशीनरी ठोस सबूतों के बजाय अपनी राय और अनुमानों के आधार पर किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, यानी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकार, का उल्लंघन करती है तो अदालतें मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेंगी
अदालत
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- NSA हिरासत को अवैध क्यों माना गया?
- अदालत ने पाया कि हिरासत के पीछे कोई ठोस सबूत या वीडियो फुटेज नहीं था और आकृति को हिंसा से पहले हिरासत में लिया गया था, इसलिए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के रूप में देखा गया।
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