सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- लापता भारतीय की जांच की कानूनी ज़िम्मेदारी क्या
यूक्रेन के पास हमले में लापता नाविक मामले में केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल
यूक्रेन के ब्लैक सी में लापता भारतीय नाविक दीपक कुमार गुप्ता की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानूनी जिम्मेदारियों और जांच के प्रावधानों के बारे में सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने संबंधित देशों के युद्ध की घोषणा न होने और जांच के लिए किस संधि के तहत कार्रवाई हो सकती है, इस पर भी विचार किया।
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यूक्रेन के पास ब्लैक सी में कार्गो जहाज पर हमले के बाद लापता भारतीय नाविक दीपक कुमार गुप्ता की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानूनी प्रावधानों के बारे में पूछा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी की पीठ ने याचिकाकर्ता से जांच की मांग पर चर्चा की।
जांच की कानूनी जटिलताएं
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि किस संधि के तहत जांच हो सकती है, क्योंकि संबंधित देशों ने युद्ध की घोषणा नहीं की है। जस्टिस बागची ने कहा कि यदि युद्ध की घोषणा होती तो जिनेवा कन्वेंशन और अन्य युद्ध से संबंधित प्रावधान लागू होते। उन्होंने यह भी कहा कि 7 से 10 दिन बाद बचाव अभियान चलाना बहुत हद तक सैद्धांतिक बात है, क्योंकि जीवित बचाना मुश्किल होता है।
जस्टिस बागची ने सुझाव दिया कि संबंधित शिपिंग पोत ऑपरेटर से मुआवज़ा दिलाने में अधिकारी याचिकाकर्ता की मदद करें। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसियों की कमियां गिनाने से बेहतर है कि कम से कम आर्थिक मदद दी जाए।
अंतरराष्ट्रीय और प्रशासनिक पहलू
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या जांच के लिए दिल्ली पुलिस को रोमानिया और यूक्रेन भेजा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने इस पर सवाल उठाए कि भारतीय अधिकारियों की जांच करने की ज़िम्मेदारी क्या है।
सॉलिसिटर जनरल ने भारतीय राजदूत के बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि 26 जुलाई के बाद समुद्र में खोज अभियान रोक दिया गया था। जस्टिस बागची ने कहा कि कार्रवाई रिपोर्ट में सही जानकारी दी गई लगती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पता नहीं है कि क्या उन लोगों को युद्ध-ग्रस्त इलाकों में जाने के लिए मजबूर किया गया।
भारतीय अधिकारियों ने घटना की जांच के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया
याचिकाकर्ता के वकील
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या विदेश में जांच के लिए भारतीय पुलिस अधिकारी भेजे जाएंगे?
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को रोमानिया और यूक्रेन भेजने पर भी सवाल किया है, लेकिन इस बारे में अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
- क्या किसी आर्थिक सहायता या मुआवज़े की संभावना है?
- जस्टिस बागची ने सुझाव दिया है कि शिपिंग कंपनी से मुआवज़ा दिलाने और याचिकाकर्ता को आर्थिक मदद देने की कोशिश की जाए।
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