सिरोही के आंचलिया आदेश्वर मंदिर में पर्युषण के दूसरे दिन विशेष आयोजन
श्रद्धालुओं ने आत्मचिंतन और तपस्या से मन की शुद्धि पर दिया जोर
सिरोही के आंचलिया आदेश्वर मंदिर में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन जैन समुदाय ने आत्मचिंतन, उपवास और धर्मोपदेशों के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास किया। मंदिर में विशेष सजावट के साथ श्रद्धालुओं ने प्रतिक्रमण कर प्रायश्चित का समारोह किया।
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सिरोही। सिरोही के राजमहल क्षेत्र में स्थित आंचलिया आदेश्वर भगवान मंदिर में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन विशेष धार्मिक आयोजन हुए। मंदिर परिसर में रुई, मोती और बादला से आकर्षक सजावट की गई और दिनभर श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
पर्युषण के दूसरे दिन जैन समाज में आत्मचिंतन, मन की शुद्धि और व्यवहार में विनम्रता लाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दिगंबर परंपरा में इस दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की जाती है, जिसमें अहंकार का त्याग और मन की कोमलता का भाव प्रमुख होता है।
श्वेतांबर परंपरा में संत-साध्वियों के प्रवचन सुनकर कर्म निर्जरा के उपायों को समझने और आत्मशुद्धि का प्रयास किया जाता है। श्रद्धालुओं ने क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को कम करने का संकल्प लिया और मंदिरों तथा उपाश्रयों में साधु-साध्वियों के धर्मोपदेश सुने।
श्रद्धालुओं ने उपवास, एकासन और आयंबिल जैसी तपस्याएं भी कीं। दिनभर धार्मिक आराधना के बाद शाम को प्रतिक्रमण किया गया, जिसमें दैनिक जीवन में हुई अशुद्धियों और जीव हिंसा के लिए प्रायश्चित करते हुए आत्मचिंतन किया गया।
मंदिर परिसर में संयम, तप और आत्मशुद्धि का माहौल बना रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन जैन समाज में क्या विशेष होता है?
- इस दिन आत्मचिंतन के साथ व्यवहार में विनम्रता लाने पर खास ध्यान दिया जाता है।
- पर्युषण के दूसरे दिन शाम को क्या आयोजन हुआ?
- शाम को प्रतिक्रमण किया गया, जिसमें दैनिक जीवन की अशुद्धियों और जीव हिंसा के लिए प्रायश्चित किया जाता है।
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