सिरोही में नाले में फंसे बैल को खुशी सेवा ट्रस्ट ने JCB से निकाला
फ्रेंड्स कॉलोनी के काला छपरा में देर रात गहरे नाले से बैल को सुरक्षित बाहर निकाला गया
सिरोही के फ्रेंड्स कॉलोनी काला छपरा में 10 फीट गहरे नाले में फंसे बैल को खुशी सेवा ट्रस्ट की टीम ने JCB की मदद से बाहर निकाला। पशु अस्पताल की टीम ने बैल को उपचार भी प्रदान किया। आसपास के इलाके में वन्यजीवों की आवाजाही के कारण बैल के लिए खतरा था।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
सिरोही। सिरोही के फ्रेंड्स कॉलोनी काला छपरा में रविवार देर रात 10 फीट से अधिक गहरे नाले में फंसे बैल को खुशी सेवा ट्रस्ट की टीम ने JCB की मदद से बाहर निकाला। आसपास के लोगों ने बैल के चिंगाड़ने की आवाज सुनकर ट्रस्ट संचालक गौरव कौशिक और विष्णुदत्त कौशिक को सूचना दी।
ट्रस्ट के संचालकों ने तुरंत 10 से 12 साथियों को मौके पर बुलाया। नाले में फंसे बैल को निकालने के लिए बाद में एक JCB भी मंगवाई गई। टीम ने रस्सियों से बैल को बांधकर धीरे-धीरे JCB की मदद से नाले से बाहर निकाला।
रस्सियों से बंधे होने और आसपास की भीड़ व JCB की आवाज से बैल की हालत पहले से खराब थी और वह घबरा गया। नाले से बाहर आने के बाद वह काफी देर तक इलाके में दौड़ता रहा।
खुशी सेवा ट्रस्ट की टीम ने पशु अस्पताल की टीम को बुलाया, जिसमें भाग्यदत्त डोण्डियार की टीम ने बैल को काबू कर रास्ते में ही जरूरी दवाइयां और इंजेक्शन लगाए।
बैल को नाले से निकालने में हितेन राणा, संजय राणा, करण राणा, राहुल राणा, मयूर राणा, अशोक भाई, मुशिर, शब्बीर और JCB चालक जगजीत ने सहयोग किया।
आबादी क्षेत्र होने के बावजूद इलाके में देर रात भालू और पैंथर की आवाजाही रहती है, जिससे बैल के लंबे समय तक नाले में फंसे रहने पर वन्यजीवों के हमले का खतरा था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बैल को निकालने के लिए किन लोगों ने मदद की?
- हितेन राणा, संजय राणा, करण राणा, राहुल राणा, मयूर राणा, अशोक भाई, मुशिर, शब्बीर और JCB चालक जगजीत ने सहयोग किया।
- बैल की हालत नाले से बाहर आने के बाद कैसी थी?
- बैल डर गया था और काफी देर तक इलाके में दौड़ता रहा।
- खुशी सेवा ट्रस्ट ने बैल को कब और कैसे सहायता दी?
- रात को ट्रस्ट ने सूचना मिलते ही 10-12 सदस्यों को बुलाकर JCB मंगवाई और रस्सियों से बांधकर बैल को सुरक्षित बाहर निकाला।
- बैल के लंबे समय तक फंसे रहने का खतरा क्या था?
- वन्यजीवों जैसे भालू और पैंथर के हमले का खतरा था क्योंकि यह क्षेत्र आबादी के बावजूद उनके आवाजाही का इलाका है।
- पशु अस्पताल की टीम ने क्या किया?
- भाग्यदत्त डोण्डियार की टीम ने रास्ते में बैल को काबू कर आवश्यक दवाइयां और इंजेक्शन लगाए।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद





Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.