सपा विधायक अतुल प्रधान को हाउस अरेस्ट, पुलिस ने घर से निकलने से रोका
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के विरोध में जाने वाले विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोक दिया
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर विरोध जताने के लिए जाने वाले सपा विधायक अतुल प्रधान को उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर पुलिस ने घर से बाहर निकलने से रोका। इसी प्रकार सपा सांसद हरेंद्र मलिक को भी नजरबंद किया गया। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है।
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सहारनपुर। सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर विरोध जताने के लिए जाने वाले सपा विधायक अतुल प्रधान को उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया। पुलिस ने सोमवार को उनके घर से निकलने नहीं दिया, जबकि सांसद हरेंद्र मलिक को भी नजरबंद किया गया।
सहारनपुर में 5 सितंबर को मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। सोमवार को सपा और AIMIM के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सहारनपुर जाना था, जिसमें सपा विधायक अतुल प्रधान और AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान शामिल थे। पुलिस ने दोनों नेताओं को उनके घरों पर ही रोक दिया।
सरधना के विधायक अतुल प्रधान को शास्त्रीनगर स्थित उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किया गया। उनके घर पर सीओ समेत 20 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस ने उनकी गाड़ी के आगे अपनी गाड़ी खड़ी कर दी और समर्थकों के विरोध के बावजूद उन्हें जाने नहीं दिया।
अतुल प्रधान ने कहा, "ये कैसा लोकतंत्र है, जहां हम अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज नहीं उठा सकते। हम अन्याय का विरोध करते हैं तो हमारे घरों में पुलिस लगा दी जाती है। इस सरकार में पूरी तरह लोकतंत्र का हनन हो रहा है।" उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा के इशारे पर काम कर रही है और गलत तरीके से कार्रवाई कर रही है।
सपा सांसद हरेंद्र मलिक को भी उनके मुजफ्फरनगर स्थित आवास पर नजरबंद किया गया। उन्हें भी सहारनपुर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया था।
अतुल प्रधान ने बताया कि उनकी कोर्ट में तारीख भी है और सरधना विधानसभा क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में जाना था। उन्होंने पुलिस से कहा कि उन्हें कोर्ट में तारीख पर ले चलें। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच नोकझोंक भी हुई।
पुलिस ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है।
विरोध और पोस्टर विवाद
प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर पहुंचने से पहले रविवार को शहर के बड़े अस्पताल पुल पर विवादित पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर पर लिखा था, ‘ना भूले थे, ना भूले हैं, ना भूलेंगे, मुजफ्फरनगर दंगा।’ पोस्टर में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर भी थी। पुलिस ने पोस्टर हटवा दिए और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य मौके की स्थिति का जायजा लेना और पूरे मामले की जानकारी जुटाना था।
नेताओं के बयान
अतुल प्रधान ने कहा, "हमारी पार्टी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल वहां जाएगा। आपके हाथ में लाठियां हैं, हमारे ऊपर चलाओ।" उन्होंने सवाल उठाया कि इस देश में मस्जिदों को ही निशाना क्यों बनाया जाता है और क्या लोकतंत्र में अपनी बात कहने का हक नहीं रहा।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा के इशारे पर काम कर रही है।
लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करेंगे कानून व्यवस्था बनी रहे.
ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अतुल प्रधान को हाउस अरेस्ट क्यों किया गया?
- पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें और अन्य नेताओं को सहारनपुर जाने से रोका।
- प्रतिनिधिमंडल का सहारनपुर आने का उद्देश्य क्या था?
- वे मौके की स्थिति का जायजा लेने और पूरे मामले की जानकारी जुटाने के लिए जा रहे थे।
- क्या पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई विवादित पोस्टरों के संबंध में भी की?
- हाँ, पुलिस ने पोस्टर हटवाए और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य खंगाले।
- अतुल प्रधान ने पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर पुलिस गलत तरीके से कार्रवाई कर रही है।
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