शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक टूटा
कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ती तेल कीमतों से बाजार दबाव में
11 सितंबर को कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई, जिससे सेंसेक्स 708 अंक टूटकर 74,194 पर और निफ्टी 239 अंक गिरकर 23,238 पर बंद हुआ। मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जबकि वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी देखी गई। निवेशकों को जोखिम समझकर निवेश करने और प्रमाणित सलाहकार से परामर्श करने की सलाह दी गई है।
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कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच 11 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार गैप-डाउन के साथ खुला। सेंसेक्स 708.23 अंक या 0.95 प्रतिशत गिरकर 74,194.36 पर और निफ्टी 239.70 अंक या 1.02 प्रतिशत गिरकर 23,238.10 पर आ गया।
शेयर बाजार में यह गिरावट वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आई है। हेंगसेंग इंडेक्स करीब 0.95 प्रतिशत, शंघाई 0.60 प्रतिशत, ताइवान 1.58 प्रतिशत और कोस्पी 2.58 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं। जापान का निक्केई 3 प्रतिशत गिर गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1 प्रतिशत बढ़कर 108.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
निफ्टी मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा 1.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी ऑटो 0.78 प्रतिशत फिसला और निफ्टी आईटी 0.75 प्रतिशत नीचे रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी क्रमशः 1.42 और 1.40 प्रतिशत की गिरावट आई। सोने और चांदी के वायदा भाव भी क्रमशः 0.84 और 1.5 प्रतिशत गिर गए।
गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगभग सपाट खुले और ज्यादातर समय सीमित दायरे में कारोबार करते रहे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर निवेशकों के मूड पर बना रहा, जिससे बाजार में कोई खास तेजी या मंदी नहीं दिखी। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स में सुधार हुआ और वे बढ़त के साथ बंद हुए।
निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23,350 से 23,400 के बीच है, जबकि रेजिस्टेंस 23,550 से 23,600 के स्तर पर है। अगर निफ्टी 23,600 के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी 23,800 तक बढ़ सकती है। ट्रेडर्स के लिए 23,350/74,600 अहम सपोर्ट जो बिकवाली को रोक सकता है, जबकि 23,500/75,000 के ऊपर जाना तेजी का संकेत होगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और शिपिंग रूट पर हमलों से सप्लाई में रुकावट का डर बढ़ा है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे महंगाई का डर भी बढ़ा है और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना मजबूत हुई है।
निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे बाजार जोखिमों को समझकर ही निवेश करें और किसी प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
NSE 17 सितंबर को 12.64 करोड़ शेयरों तक के ऑफर फॉर सेल (OFS) और 1,700 से 1,785 रुपये के अनुमानित प्राइस बैंड के साथ अपना आईपीओ लॉन्च करेगा।
यह गिरावट पिछले आठ दिनों से जारी बाजार दबाव का हिस्सा है, जिसमें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल प्रमुख कारण हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शेयर बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
- गिरावट के पीछे वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य कारण हैं।
- मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स का प्रदर्शन कैसा रहा?
- मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 1.42 प्रतिशत और 1.40 प्रतिशत की गिरावट आई।
- निफ्टी के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं?
- निफ्टी के लिए सपोर्ट 23,350 से 23,400 के बीच और रेजिस्टेंस 23,550 से 23,600 के स्तर पर है।
- क्या मिडिल ईस्ट का तनाव तेल की कीमतों पर असर डाल रहा है?
- हां, मिडिल ईस्ट में तनाव और शिपिंग रूट पर हमलों से सप्लाई में रुकावट का डर बढ़ा है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
- निवेशक अब क्या सावधानी बरतें?
- निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे बाजार जोखिमों को समझकर ही निवेश करें और प्रमाणित सलाहकार से परामर्श लें।
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