अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर पार
तेल की बढ़ती कीमतों से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ती लड़ाई और तेल सप्लाई में रुकावट के चलते तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। यह इस साल 21 मई के बाद पहली बार हुआ है जब ब्रेंट क्रूड का भाव इस स्तर पर पहुंचा है। तेल की बढ़ती कीमतों से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
अमेरिका-ईरान के बीच छह महीने से जारी तनाव के चलते गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में सात प्रतिशत तक की तेजी आई। अगस्त की शुरुआत के मुकाबले कच्चे तेल की कीमत 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि सैन्य संघर्ष नवंबर के मध्यावधि चुनावों तक समाप्त हो जाएगा, जबकि उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने इसे जनवरी 2029 तक खिंचने की आशंका जताई है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के अगले हमलों का जवाब करारी प्रतिक्रिया से दिया जाएगा। इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी के बोर्ड ने ईरान के परमाणु नियमों का उल्लंघन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजने के लिए 23-3 वोट से प्रस्ताव पारित किया।
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर हमले किए, जिससे कई अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त हुए। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने 30 से अधिक पैट्रियट मिसाइलें दागीं। इसके पहले अमेरिका ने ईरान के पांच टैंकरों पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने आठ टैंकरों और दो युद्धपोतों पर हमले किए।
मिडिल ईस्ट में लड़ाई बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में फिलहाल राहत है, लेकिन बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम में 7.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी।
यमन के हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सेनाओं के बीच लड़ाई तेज होने से तेल की सप्लाई में रुकावट का डर है। लाल सागर के पास बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास खतरा बढ़ा है, जो विश्व व्यापार और ऊर्जा परिवहन का अहम मार्ग है। इस मार्ग पर रुकावट से तेल की सप्लाई प्रभावित होगी और परिवहन लागत बढ़ेगी।
2026 में कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। अप्रैल में यह 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंची थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सऊदी अरब और हूतियों के बीच युद्ध बढ़ा तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। निवेशक इस बात पर नजर रखे हैं कि लड़ाई लंबी चली तो सप्लाई कितनी प्रभावित होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अमेरिका का युद्ध कितने समय तक चलने की संभावना है?
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध नवंबर के मध्यावधि चुनाव तक खत्म होगा, जबकि उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने इसे जनवरी 2029 तक बढ़ने की आशंका जताई है।
- ईरान ने अमेरिका पर कौन से हमले किए हैं?
- ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर हमले किए और पांच टैंकरों पर हमला किया, इसके बाद उसने आठ टैंकरों और दो युद्धपोतों पर भी हमले किए।
- मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण क्या खतरे हैं?
- लाल सागर के बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास लड़ाई बढ़ने से तेल सप्लाई रुकावट और परिवहन लागत में इजाफा होने की संभावना है।
- 2026 में तेल की कीमतों का क्या हाल रहा है?
- अप्रैल 2026 में कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचा था और कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखे गए।
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