रोहिणी घावरी ने वाल्मीकि समाज को नजरअंदाज करने पर चंद्रशेखर पर हमला
लखनऊ पहुंचकर रोहिणी ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी, वंचित समाज को केंद्र में रखने पर जोर
पूर्व प्रेमिका रोहिणी घावरी ने लखनऊ में कहा कि वाल्मीकि और वंचित समाज को नजरअंदाज कर कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में नहीं आ सकता। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद की राजनीति पर भी आलोचना की और भविष्य में विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद की संभावना जताई। रोहिणी ने सामाजिक और राजनीतिक दायरे का विस्तार करने की इच्छा व्यक्त की है।
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आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की पूर्व प्रेमिका रोहिणी घावरी सोमवार को लखनऊ पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वंचित समाज और खासतौर पर वाल्मीकि समाज को नजरअंदाज कर कोई भी राजनीतिक पार्टी सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी।
रोहिणी घावरी मेरठ से जनशताब्दी ट्रेन से दोपहर करीब 1 बजे लखनऊ पहुंचीं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में वह अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ संवाद कर सकती हैं।
रोहिणी लगातार वाल्मीकि समाज और सर्वसमाज को अपने राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रख रही हैं। उन्होंने चंद्रशेखर के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने पर प्रतिक्रिया दी और लिखा कि वाल्मीकि समाज की बेटी देश की बेटी बन गई है।
उन्होंने कहा, "पेट में दर्द होना लाजमी है।" रोहिणी ने चंद्रशेखर की राजनीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि "इनके नेता की पहचान दलितों के नेता ही बनी रह गई। कभी सर्व समाज ने नहीं स्वीकारा तो मुझसे जलन होना स्वाभाविक है।"
रोहिणी ने बताया कि उन्हें वापस आए अभी सिर्फ दो दिन हुए हैं और विरोधियों की तरफ से प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। उन्होंने लिखा, "मुझे वापस आए सिर्फ 2 दिन ही हुए और इनका रोना शुरू हो गया। अब देखो मेरी मेहनत।"
उन्होंने करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अम्मू पाल की ओर से मिले सम्मान का भी जिक्र किया और कहा कि अम्मू पाल ने अपनी कुर्सी पर बैठाकर उनका सम्मान किया। यह सम्मान इस बात का संकेत है कि वह केवल एक राजनीतिक नेता के समर्थक वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि व्यापक सामाजिक दायरा बनाने की कोशिश कर रही हैं।
रोहिणी के सार्वजनिक रूप से सक्रिय होने के बाद पिछले दो दिनों में सोशल मीडिया पर उनके और चंद्रशेखर के समर्थकों के बीच बयानबाजी तेज हुई है। लखनऊ पहुंचकर उनके "अगली बड़ी खबर" वाले पोस्ट ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है। हालांकि उन्होंने अभी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने का औपचारिक ऐलान नहीं किया है।
उनका फोकस अब केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि वाल्मीकि समाज, वंचित समाज और सर्वसमाज को लेकर बयान दे रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- रोहिणी की राजनीतिक योजना क्या है?
- उन्होंने संकेत दिया है कि वह अलग-अलग राजनीतिक दलों से संवाद कर सकती हैं, लेकिन अभी किसी दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
- अम्मू पाल का सम्मान क्या दर्शाता है?
- यह सम्मान इस बात की निशानी है कि रोहिणी केवल राजनीतिक समर्थक तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि व्यापक सामाजिक दायरा बनाना चाहती हैं।
- वाल्मीकि समाज को लेकर रोहिणी का संदेश क्या है?
- रोहिणी ने कहा कि वाल्मीकि समाज की बेटी देश की बेटी बन गई है और कोई भी पार्टी वंचित समाज की अनदेखी कर सत्ता हासिल नहीं कर सकती।
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