पीएम मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया
तमिल साहित्य की प्राचीन रचना तिरुक्कुरल में जीवन, समाज और शासन के विचार हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। तिरुक्कुरल में नैतिकता, समाज, शासन और प्रेम से जुड़े विचार संक्षिप्त दोहों में प्रस्तुत हैं। यह प्राचीन साहित्यिक रचना विश्वभर की भाषाओं में अनुवादित हो रही है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह किताब भारत की प्राचीन साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा की झलक पेश करती है। तिरुक्कुरल में इंसान के जीवन, समाज, शासन और प्रेम से जुड़े गहरे विचार संक्षिप्त दोहों में समाहित हैं।
तिरुक्कुरल तमिल भाषा की एक प्राचीन क्लासिकल रचना है, जिसके रचयिता महान कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर माने जाते हैं। इस ग्रंथ में कुल 1,330 दोहे हैं, जो 133 अध्यायों में विभाजित हैं। इसकी खासियत यह है कि बहुत कम शब्दों में जीवन और समाज से जुड़े बड़े विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
पहले हिस्से 'अरम' में नैतिकता, सदाचार और अच्छे आचरण की बातें हैं, जिसमें सत्य, संयम, दया, अहिंसा और कर्तव्य जैसे विषय शामिल हैं। यह हिस्सा व्यक्ति के सही आचरण और बेहतर जीवन पर केंद्रित है।
तिरुक्कुरल केवल व्यक्तिगत नैतिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शासन, राज्य व्यवस्था, राजा के कर्तव्य, न्याय, नेतृत्व, प्रशासन, समाज, मित्रता, ज्ञान और व्यवहार जैसे विषयों पर भी विचार हैं। शासक को जनता के प्रति अपने दायित्व निभाने की सलाह दी गई है।
ग्रंथ में प्रेम और मानवीय भावनाओं से जुड़े विषय भी शामिल हैं। इस प्रकार तिरुक्कुरल में व्यक्ति का आचरण, समाज और शासन तथा प्रेम और भावनाओं के तीन बड़े पहलुओं को स्थान मिला है।
तमिलनाडु राजभवन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार यह रचना मुख्य रूप से नैतिकता और सदाचार पर केंद्रित, सार्वभौमिक और गैर-सांप्रदायिक है। इसमें शासकों के नैतिक दायित्व, कृषि, ज्ञान, दोस्ती, घरेलू जीवन और प्रेम की चर्चा भी है, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ा जा सकता है।
तिरुवल्लुवर को तमिल साहित्य और संस्कृति में अत्यंत सम्मान प्राप्त है। उनके नाम पर तिरुवल्लुवर दिवस मनाया जाता है, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार श्रद्धांजलि दी है। जनवरी 2015 में मोदी ने तिरुक्कुरल के गुजराती अनुवाद का विमोचन किया था और जनवरी 2026 में लोगों से तिरुक्कुरल पढ़ने की अपील की थी।
31 अगस्त 2026 को ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के महात्मा गांधी सेंटर में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय संस्कृति और इंडोलॉजी से जुड़े छात्रों से बातचीत के दौरान तिरुक्कुरल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सदियों पुरानी रचना आज भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत है, जिसमें आध्यात्मिकता, दर्शन और व्यावहारिक समझ शामिल है।
मोदी ने विश्वविद्यालय की 80वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए तिरुक्कुरल के उज्बेक भाषा में अनुवाद की संभावना पर चर्चा की, जिसे कार्यक्रम में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। तिरुक्कुरल का दायरा केवल तमिल भाषा या तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अनेक भाषाई अनुवाद उपलब्ध हैं।
2023 के काशी तमिल संगमम में तिरुक्कुरल के बहुभाषी और ब्रेल संस्करण भी प्रस्तुत किए गए थे। इस प्रकार तिरुक्कुरल को विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- तिरुक्कुरल किस प्रकार के विषयों को समेटता है?
- इसमें व्यक्तिगत नैतिकता, शासन व्यवस्था, प्रेम और मानवीय भावनाओं जैसे विविध विषय शामिल हैं।
- तिरुवल्लुवर का तिरुक्कुरल में योगदान क्या है?
- तिरुवल्लुवर तिरुक्कुरल के रचयिता हैं और उन्हें तमिल साहित्य व संस्कृति में अत्यंत सम्मान प्राप्त है।
- पीएम मोदी ने तिरुक्कुरल को किस अवसर पर जिक्र किया था?
- 31 अगस्त 2026 को उन्होंने ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में भारतीय संस्कृति से जुड़े छात्रों से बातचीत के दौरान इसका उल्लेख किया।
- तिरुक्कुरल की वैश्विक पहुंच कैसे हो रही है?
- इसका अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और उज्बेक भाषा में अनुवाद की संभावना पर चर्चा हुई है।
- तिरुक्कुरल का आधुनिक महत्व क्या है?
- यह आज भी आध्यात्मिकता, दर्शन और व्यावहारिक समझ में प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।
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