पाकिस्तान ने आतंकी सूची में 35 प्रतिशत वृद्धि कर IMF को साधा निशाना
आसिम मुनीर की चाल से FATF की बैठक में भारत की सख्ती पर असर पड़ने की कोशिश
पाकिस्तान ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में 35 प्रतिशत वृद्धि करते हुए नाम 1330 से बढ़ाकर 1890 कर दिए हैं और जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर पर ईनाम बढ़ाया है। यह कदम FATF की आगामी बैठक से पहले पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने और IMF से प्राप्त कर्ज प्रभावित न होने के लिए उठाया गया है। भारत इस बैठक में पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में डालने की कोशिश करेगा।
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पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिंग एजेंसी ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की नई रेड बुक जारी की है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर घोषित ईनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है। इस सूची में आतंकियों के नामों में कुल 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो FATF की आगामी बैठक से पहले पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की रणनीति मानी जा रही है।
इस बार जारी रेड बुक में आतंकियों के नाम 1330 से बढ़कर 1890 हो गए हैं। इसमें 26/11 हमले में शामिल कई आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF, जो आतंकी फंडिंग रोकने के लिए बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, अक्टूबर में प्रस्तावित बैठक में पाकिस्तान के कदम को दिखावा मान रहा है।
FATF 1989 में जी7 देशों ने मिलकर बनाया था और 9/11 हमलों के बाद इसमें आतंकी फंडिंग और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के उपाय शामिल किए गए। यह संगठन देखता है कि कोई देश अपने वित्तीय सिस्टम से आतंकी फंडिंग को कितनी प्रभावी ढंग से रोक पा रहा है।
जून 2018 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा था और 27 मोर्चों पर सुधार के लिए एक्शन प्लान दिया था। अक्टूबर 2021 में पाकिस्तान ने 26 में से 26 एक्शन पूरे करने का दावा किया था, लेकिन बाद में सात और एक्शन दिए गए।
पाकिस्तान की इस नई सूची और बढ़ोतरी को FATF की आगामी बैठक में भारत की सख्ती से बचने की चाल माना जा रहा है। भारत इस बैठक में पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में डालने की कोशिश करेगा, जिससे IMF से मिलने वाले कर्ज पर असर पड़ेगा।
ग्रे लिस्ट में रहने वाले देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संस्थान लेन-देन बंद कर देते हैं, जिससे विदेशी निवेश कम होता है और कर्ज लेना महंगा हो जाता है। पाकिस्तान को IMF से लगभग 8.4 अरब डॉलर का कर्ज मिलना है, जिसके लिए मई 2026 तक तीन रिव्यू पूरे हो चुके हैं।
इसलिए पाकिस्तान ने अपनी छवि सुधारने के लिए आतंकी सूची में नाम बढ़ाकर और खुद को FATF के सामने अच्छा दिखाकर IMF से मिलने वाले कर्ज में बाधा न आने की कोशिश शुरू कर दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- FATF क्या है और कब बना था?
- FATF 1989 में जी7 देशों ने बनाया था और यह आतंकी फंडिंग रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन है।
- पाकिस्तान को FATF ने ग्रे लिस्ट में कब रखा था?
- FATF ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा था और सुधार के लिए 27 मोर्चों पर एक्शन प्लान दिया था।
- आतंकी सूची में इस बार कितने नाम शामिल हैं?
- नई सूची में आतंकियों के कुल नाम 1890 हो गए हैं, जो पहले 1330 थे।
- ग्रे लिस्ट में रहने वाले देश किस समस्या का सामना करते हैं?
- ग्रे लिस्ट में देश अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संस्थानों से लेन-देन बंद होने और विदेशी निवेश घटने जैसी समस्याओं से जूझते हैं।
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