लोक आस्था से जुड़ा हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाया जाएगा
सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रख पति की लंबी आयु की कामना करती हैं
हरतालिका तीज इस बार 14 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रख अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं जल का त्याग करती हैं और रात में मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाती हैं। इस अवसर पर बाजारों में खरीदारी का सिलसिला तेजी से चल रहा है।
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लोक आस्था। लोक आस्था और परंपरा से जुड़ा हरतालिका तीज इस बार सोमवार 14 सितंबर को नगर क्षेत्र में मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रख पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर जल नहीं पीतीं और रात में मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाती हैं।
भादों माह में मनाए जाने वाले हरतालिका तीज व्रत का बड़ा महत्व है। पुराणों के अनुसार, पूर्व जन्म में पार्वती ने शंकर को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर बाल अवस्था में घोर तपस्या की थी। इसी कारण व्रत के दिन महिलाएं अन्न और जल का त्याग करती हैं।
सुहागिन महिलाएं खरीदे गए नए वस्त्र भगवान को भेंट करती हैं। पति के हाथों फल और प्रसाद लेकर व्रत तोड़ा जाता है। इसके अलावा, बहन-बेटियों को उनके ससुराल से लाने-ले जाने का सिलसिला एक सप्ताह से चल रहा है। मां-बाप की ओर से भी उन्हें नए वस्त्र और अन्य सामग्री भेंट की जाती है।
बाजारों में हरतालिका तीज के मद्देनजर खरीदारी का सिलसिला तेज हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हरतालिका तीज व्रत का पौराणिक महत्व क्या है?
- इस व्रत की कथा अनुसार पार्वती ने शंकर को पति रूप में पाने हेतु हिमालय पर बाल अवस्था में तपस्या की थी।
- हरतालिका तीज के अवसर पर बाजारों में क्या परिवर्तन होता है?
- बाजारों में खरीदारी का सिलसिला तेज हो जाता है।
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