जोधपुर के आभानाडा में चमड़ा उद्योग 5 बीघा में फैला, ग्रामीणों ने प्रदूषण का आरोप लगाया
कोर्ट की 2 बीघा अनुमति के बावजूद उद्योग ने 5 बीघा में काम बढ़ाया, प्रदूषण बोर्ड ने किया निरीक्षण
जोधपुर के आभानाडा क्षेत्र में चमड़ा उद्योग को कोर्ट द्वारा 2 बीघा जमीन में काम करने की अनुमति मिली थी, लेकिन ग्रामीणों ने बताया कि यह उद्योग लगभग 5 बीघा इलाके में फैल गया है, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य खतरे बढ़ गए हैं। ग्रामीणों ने केमिकल पानी के खुले में जमा होने और इससे पशुओं तथा लोगों को खतरा होने की बात कही है, वहीं अधिकारियों ने मौके पर जांच की है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
जोधपुर। जोधपुर के आभानाडा क्षेत्र में चमड़ा उद्योग को कोर्ट के आदेश पर 2 बीघा जमीन में काम करने की अनुमति मिली थी। लेकिन ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उद्योग का काम लगभग 5 बीघा इलाके में फैल चुका है, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं।
मथानिया नगरपालिका के जटिया बास से चमड़ा उद्योग को आबादी और प्रदूषण की समस्या के कारण आभानाडा क्षेत्र में शिफ्ट किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि कोर्ट ने करीब 2 बीघा जमीन में काम करने की अनुमति दी थी, लेकिन मौके पर चमड़ा प्रोसेसिंग का काम लगभग 5 बीघा इलाके में फैल चुका है।
ग्रामीणों ने बताया कि पानी के कैचमेंट एरिया के पास खुले में काम हो रहा है और केमिकल वाला पानी जमा हो रहा है, जिससे आसपास के लोगों और जानवरों को खतरा बना हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को खुले में रखे केमिकल और तेजाब के गैलन, गंदा पानी और कास्टिक वाले पानी के गड्ढे भी दिखाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कास्टिक वाला पानी तालाब जैसे गड्ढे में जमा हो रहा है, जिसे पीने से गायों और अन्य आवारा पशुओं की जान जा सकती है। खास बात यह है कि इसी इलाके के पास तालाब, गौशाला, स्कूल, मंदिर और आबादी भी है।
मथानिया नगरपालिका तालाब की खुदाई और पानी इकट्ठा करने का काम कर रही है। गुरुवार को ऑनलाइन शिकायत मिलने पर प्रदूषण बोर्ड के ग्रामीण जोधपुर के जूनियर इंजीनियर कमल मोरिया मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान खुले परिसर में चमड़ा प्रोसेसिंग के लिए टंकियां, पानी के ड्रम और चमड़े से भरे बोरे मिले।
कमल मोरिया ने बताया कि मौके पर जांच की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- चमड़ा उद्योग को आभानाडा क्षेत्र में क्यों शिफ्ट किया गया?
- मथानिया नगरपालिका के जटिया बास में आबादी और प्रदूषण की समस्या के कारण इसे आभानाडा क्षेत्र में शिफ्ट किया गया था।
- ग्रामीणों ने किस तरह के प्रदूषण की शिकायत की है?
- ग्रामीणों ने खुले में केमिकल और तेजाब के गैलन, गंदा पानी, कास्टिक वाले पानी के गड्ढे होने की बात कही है।
- कास्टिक वाले पानी का क्या खतरा है?
- कास्टिक वाला पानी तालाब जैसे गड्ढे में जमा हो रहा है, जिससे गायों और आवारा पशुओं की जान जा सकती है।
- इलाके में और कौन-कौन सी संस्थाएं और स्थान हैं?
- इसी इलाके के पास तालाब, गौशाला, स्कूल, मंदिर और आबादी भी स्थित हैं।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद





Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.