जामिया गर्ल्स हॉस्टल में खाने की खराब क्वालिटी पर छात्राओं का प्रदर्शन जारी
छात्राओं ने कांच के टुकड़े और कीड़े मिलने का आरोप लगाते हुए मेस ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
जामिया मिलिया इस्लामिया के जम्मू एंड कश्मीर गर्ल्स हॉस्टल में खाने की खराब गुणवत्ता और कांच के टुकड़े व कीड़े मिलने के कारण छात्राओं का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्राओं ने धरना समाप्त किया।
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जामिया मिलिया इस्लामिया के जम्मू एंड कश्मीर गर्ल्स हॉस्टल में खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर छात्राओं का विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। वे कांच के टुकड़े और कीड़े मिलने की शिकायत कर रही हैं और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
छात्राओं ने बताया कि मेस में परोसे जाने वाले खाने में कई बार कांच के नुकीले टुकड़े और कीड़े मिले हैं। बीते 9 सितंबर को दोपहर के भोजन में छोले में कीड़े मिलने की घटना ने विरोध को तेज कर दिया। इसके बाद 10 सितंबर से छात्राओं ने जोरदार प्रदर्शन शुरू किया।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 11 सितंबर को लिखित आश्वासन दिया, लेकिन छात्राओं का आरोप था कि बुनियादी सुधार नहीं हुए, इसलिए प्रदर्शन फिर शुरू हो गया। 12 सितंबर की रात उच्चस्तरीय बैठक के बाद छात्राओं ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।
छात्राओं का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले साल नवंबर में भी एक छात्रा ने सब्जी में कांच के टुकड़े मिलने की शिकायत की थी। कोविड-19 महामारी के बाद से मेस की स्थिति और खराब हो गई है। लगभग 700 छात्राएं इस मेस पर निर्भर हैं।
लॉ की छात्रा और मेस कमेटी की सदस्य तस्लीम फातिमा ने बताया कि कोविड से पहले भी खाने की गुणवत्ता खराब थी। कभी-कभी रोटी सख्त होती है और चावल अधपका परोसा जाता है। छात्राओं ने कहा कि जब तक ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगी।
घंटों चले प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को समझा और मेस की व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दिया। छात्राओं ने राहत की सांस लेते हुए धरना समाप्त किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- खराब गुणवत्ता की शिकायतें पहले भी हुई थीं?
- हाँ, पिछले साल नवंबर में भी एक छात्रा ने सब्जी में कांच के टुकड़े मिलने की शिकायत की थी।
- कोविड-19 का खाने की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ा?
- कोविड-19 महामारी के बाद मेस की स्थिति और भी खराब हो गई है।
- छात्राओं की मुख्य मांग क्या है?
- वे ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बुनियादी सुधार की मांग कर रही हैं।
- प्रशासन ने विरोध पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 11 सितंबर को लिखित आश्वासन दिया और बाद में मेस की व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दिया।
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