अजमेर के खोड़ा गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालुओं की भीड़
300 साल पुराने पेड़ और स्वयं प्रकट हुई प्रतिमा से जुड़ी है आस्था
अजमेर के खोड़ा गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। यह मंदिर अपनी स्वयं प्रकट हुई गणेश प्रतिमा और 300 वर्ष पुराने पेड़ों की 12 आकृतियों के लिए जाना जाता है। गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्त अपने मनोकामना के लिए धागा बांधते हैं।
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अजमेर। अजमेर का खोड़ा गणेश मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। मंदिर परिसर में 300 वर्षों से पुराने बड़ और इमली के पेड़ के तने में भगवान गणेश की 12 आकृतियां दिखाई देती हैं।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा किसी ने स्थापित नहीं की, बल्कि यह स्वयं प्रकट हुई थी। करीब 1700 ईस्वी में इस स्थान पर एक तालाब था, जिसकी मुंडेर पर यह प्रतिमा प्रकट हुई।
मंदिर में आने वाले भक्त पेड़ों के तनों पर अपनी मन्नत का धागा बांधते हैं और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। गणेश चतुर्थी पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्तों की भीड़ रहती है।
यह मंदिर अजमेर शहर से 26 किलोमीटर और किशनगढ़ से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है। निजी कार, बस, टेंपो और बाइक से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेश प्रतिमा वहां कैसे प्रकट हुई?
- प्रतिमा किसी ने स्थापित नहीं की, यह स्वयं प्रकट हुई थी।
- श्रद्धालु मंदिर में क्या करते हैं?
- भक्त पेड़ों के तनों पर मन्नत का धागा बांधते हैं।
- मंदिर पहुंचने के लिए कौन-कौन से साधन उपलब्ध हैं?
- निजी कार, बस, टेंपो और बाइक से मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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