मक्का समझौते के तहत सऊदी पर हमले से सक्रिय होगा सामूहिक रक्षा प्रावधान
तुर्की-पाकिस्तान ने हूती हमलों की निंदा की, लेकिन बचाव में नहीं उतरे
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब, और तुर्की के बीच मक्का समझौते के तहत सामूहिक रक्षा प्रावधान सक्रिय हो सकते हैं, जहाँ "एक पर हमला, सभी पर हमला" की नीति लागू होती है। तीनों देशों ने बिना उकसावे की आक्रामकता पर मिलकर जवाब देने का संकल्प जताया है, जबकि क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है।
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सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों के बाद मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए सामूहिक रक्षा समझौते के प्रावधान सक्रिय हो सकते हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी है कि बिना उकसावे की आक्रामकता पर तीनों देश मिलकर जवाब देंगे।
तुर्की और पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है, लेकिन रक्षा समझौते के बावजूद उन्होंने सऊदी अरब की रक्षा में अपनी सेनाएं नहीं भेजीं और जवाबी हमले नहीं किए। तुर्की ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए हूतियों से आक्रामक कार्रवाई तुरंत बंद करने की अपील की है।
हूतियों ने अबहा, नजरान, जिजान और खमिस मुशैत में सऊदी तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं और एयरबेस को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब के एक जेल पर हुए हमले में 17 लोगों की मौत हुई। यमन की संसद ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुछ हूती हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है, जबकि हूती इसे सऊदी कार्रवाई के जवाब में बता रहे हैं। तुर्की के अलावा ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के समर्थन का ऐलान किया है।
मक्का में पिछले महीने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए समझौते के तहत 'एक पर हमला, सभी पर हमला' की नीति लागू होती है। ख्वाजा आसिफ ने कहा, "यह कोई आक्रामक समझौता नहीं है, लेकिन अगर किसी सदस्य देश के खिलाफ बिना उकसावे की आक्रामकता होती है तो तीनों देश मिलकर जवाब देंगे।" उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे तनाव कम होगा, लेकिन हूतियों को चेतावनी दी कि वे यमन के संघर्ष को सऊदी अरब तक न फैलाएं।
सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब देशों का गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है। हूतियों ने हाल के हमलों को सऊदी अरब के दर्जनों हवाई हमलों का जवाब बताया है।
दक्षिण-पश्चिमी यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच जारी संघर्ष के कारण करीब 20 हजार लोग विस्थापित हुए हैं। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने मानवीय हालात गंभीर होने की चेतावनी दी है।
हूतियों की यह कार्रवाई यमन में संघर्ष को स्थायी राजनीतिक समाधान के जरिए खत्म करने की कोशिशों को भी नुकसान पहुंचा रही है.
विदेश मंत्रालय
सऊदी अरब के हमलों का जवाब देना उनका वैध अधिकार है, जिसकी गारंटी अंतरराष्ट्रीय कानूनों, चार्टर और प्रथाओं के तहत है.
विदेश मंत्रालय
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हुती विद्रोहियों के किन क्षेत्रों में हमले हुए हैं?
- हुती विद्रोहियों ने अबहा, नजरान, जिजान और खमिस मुशैत के क्षेत्रों में हमले किए हैं।
- अमेरिका ने हूती हमलों को लेकर क्या कहा है?
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुछ हुती हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है।
- यमन की संसद ने सऊदी जेल हमले को कैसे बताया है?
- यमन की संसद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
- यमन में विस्थापन की वर्तमान स्थिति क्या है?
- दक्षिण-पश्चिमी यमन में करीब 20 हजार लोग विस्थापित हो चुके हैं और मानवीय स्थिति गंभीर बनी हुई है।
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