पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल की कीमत 99.36 डॉलर पर पहुंची
भारत के लिए बढ़ा तेल आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ब्रेंट क्रूड 99.36 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जिससे भारत के तेल आयात बिल में वृद्धि हुई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए बढ़ती कीमतें देश के लिए आर्थिक चुनौती बन सकती हैं। इसके बावजूद, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अभी स्थिर बनी हुई हैं।
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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 99.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जिससे भारत के तेल आयात बिल में बढ़ोतरी की आशंका है।
सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों और ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए यह स्थिति देश के लिए चिंता का विषय है। अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 56 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया है, जबकि आयात की मात्रा लगभग समान रही। इसका मतलब है कि तेल महंगा होने के कारण भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़े।
पीपीएसी के अनुसार भारत जिस क्रूड बास्केट को आयात करता है, उसकी औसत कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही है, जो पिछले कुछ महीनों में काफी बढ़ी है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तीन महीने से स्थिर हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बने हुए हैं। आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः 2.61 रुपये और 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।
मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल की कीमत चार बार बढ़ाई गई थी, कुल 7.35 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल की कीमत 7.53 रुपये प्रति लीटर बढ़ी थी। अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में फिर से तेजी आने से तेल कंपनियों पर कीमत बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। महंगे कच्चे तेल का असर केवल उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि सरकारी तेल कंपनियों जैसे आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल के मुनाफे पर भी पड़ता है। अगर कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों की पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचातीं तो उनके मार्केटिंग मार्जिन पर असर पड़ता है। आईसीआरए के अनुसार मौजूदा तेजी के कारण ऑटो फ्यूल पर मार्केटिंग मार्जिन नकारात्मक हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत का तेल आयात बिल क्यों बढ़ा है?
- तेल की कीमतें महंगी होने से भारत को समान मात्रा का तेल खरीदने में अधिक डॉलर खर्च करने पड़े हैं।
- पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अभी स्थिर क्यों हैं?
- तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों की बढ़ोतरी का पूरा असर ग्राहकों तक नहीं पहुंचा रही हैं, जिससे खुदरा कीमतें तीन महीने से स्थिर हैं।
- तेल कंपनियों पर महंगे कच्चे तेल का क्या प्रभाव पड़ रहा है?
- महंगे कच्चे तेल के कारण कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे उनके मुनाफे पर नकारात्मक असर हो सकता है।
- पश्चिम एशिया के तनाव से तेल सप्लाई पर क्या असर हो सकता है?
- सऊदी अरब पर हमलों और ईरान-अमेरिका के तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।
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