ब्रेंट तेल 99.36 डॉलर पर, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का दबाव
पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, भारत के लिए महंगा आयात
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 99.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का दबाव बढ़ा है। भारत अपनी अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और तेल की बढ़ती कीमतों से सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें तीन महीने से स्थिर हैं, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।
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पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 1.44 प्रतिशत बढ़कर 99.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ गया है। देश अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है।
सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका गहरी हो गई है। अगर इस क्षेत्र से तेल का निर्यात बाधित होता है तो वैश्विक बाजार में पहले से मौजूद सप्लाई दबाव और बढ़ सकता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमत में हर बड़ी तेजी देश के लिए महंगी साबित होती है।
अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का कच्चे तेल आयात बिल 56 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो चुका है, जबकि आयात की मात्रा लगभग स्थिर रही। इसका मतलब है कि तेल महंगा होने के कारण भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़े। पीपीएसी के अनुसार, भारत जिस क्रूड बास्केट को आयात करता है, उसकी औसत कीमत सोमवार को 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पिछले कुछ महीनों में जबरदस्त उछाल दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तीन महीने से स्थिर हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बने हुए हैं। आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुए थे। मई के दूसरे हिस्से में कुल चार बार पेट्रोल की कीमत 7.35 रुपये और डीजल की कीमत 7.53 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।
तेल कंपनियों पर अब कीमत बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। महंगे कच्चे तेल का असर केवल उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता, बल्कि सरकारी तेल कंपनियों जैसे आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल के मुनाफे पर भी असर पड़ता है। अगर कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों की पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचातीं तो उनके मार्केटिंग मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आईसीआरए के अनुसार, मौजूदा तेजी के कारण ऑटो फ्यूल पर मार्केटिंग मार्जिन नकारात्मक हो सकता है।
निफ्टी 50 के अन्य शेयरों में आज एचसीएल टेक के शेयर 3.59 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 3.07 प्रतिशत, टीसीएस 1.89 प्रतिशत, भारती एयरटेल 1.23 प्रतिशत, रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.12 प्रतिशत, इंडिगो 1.08 प्रतिशत, और एचडीएफसी बैंक 0.76 प्रतिशत बढ़े। कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर 0.65 प्रतिशत, ट्रेंट 0.53 प्रतिशत, बीईएल 0.48 प्रतिशत, अडाणी पोर्ट्स 0.45 प्रतिशत, एनटीपीसी 0.39 प्रतिशत, एटरनल 0.33 प्रतिशत, टाइटन 0.25 प्रतिशत, आईटीसी 0.21 प्रतिशत और एलएंडटी के शेयर भी बढ़त में रहे।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल वायदा कारोबार में 1.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्रेंट तेल की कीमत में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
- पश्चिम एशिया में तनाव और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले तेल की सप्लाई प्रभावित कर रहे हैं।
- भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता क्यों है?
- तीन महीने से खुदरा कीमतें स्थिर हैं क्योंकि तेल कंपनियां महंगे तेल की पूरी बढ़ोतरी अभी तक ग्राहकों तक नहीं पहुंचा पा रही हैं।
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर है?
- तेल की महंगाई से भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं और तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- निफ्टी 50 में आज किन प्रमुख स्टॉकों ने बढ़त दर्ज की?
- एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टीसीएस, भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयर बढ़त में रहे।
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