CJI सूर्यकांत बोले- न्यायपालिका जांच और आलोचना के दायरे में
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार पर जोर दिया
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जांच और आलोचना का सामना करना होगा और जवाबदेही बढ़ानी होगी। उन्होंने न्यायिक पारदर्शिता, शिकायत निवारण तंत्र और आम नागरिकों के लिए न्याय व्यवस्था तक पहुंच को आसान बनाने पर जोर दिया।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जांच और आलोचना का सामना करना होगा। उन्होंने न्याय व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने और सुधार के रास्ते खोलने पर बल दिया।
सूर्यकांत ने छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में कहा कि न्यायपालिका को जांच के दायरे से बाहर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हर शिकायत को वेबसाइट पर सार्वजनिक कर देना चाहिए। न्यायपालिका का काम संविधान की रक्षा करना है और वह किसी पक्ष या विपक्ष के लिए फैसला नहीं करती। जनता का भरोसा तब बनता है जब हारने वाला पक्ष भी निष्पक्ष प्रक्रिया महसूस करे।
उन्होंने बताया कि न्यायिक संस्थानों में लगातार निगरानी जरूरी है और आम नागरिक के लिए न्याय व्यवस्था तक पहुंच आसान होनी चाहिए। न्यायपालिका रचनात्मक आलोचना को सुधार का नियम मानती है और कोई भी संस्था स्थिर नहीं रह सकती।
सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका में पारदर्शिता का मतलब सिर्फ खुले दरवाजे और सार्वजनिक सुनवाई नहीं है, बल्कि फैसले के पीछे की वजह को कोई भी देख सके। जजों के खिलाफ शिकायतों से निपटने का तंत्र मजबूत और प्रतिक्रियाशील है।
वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य महेश जेठमलानी ने व्याख्यान में कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार तब तक नहीं हो सकता जब तक फिक्सर वकील न हों, जो कानूनी प्रणाली को रिश्वत देकर प्रभावित करते हैं। उन्होंने बार काउंसिलों की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की, खासकर बार काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने के प्रयास पर।
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