नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों ने संयुक्त घोषणापत्र जारी करने पर सहमति बनाई
भारत की कूटनीति ने ईरान, सऊदी अरब और यूएई के मतभेदों के बीच साझा बयान पर राजी किया
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सभी सदस्य देशों ने कई विवादित मुद्दों पर गहन बातचीत के बाद संयुक्त घोषणापत्र जारी करने पर सहमति बना ली है। भारत ने पश्चिम एशिया के विभिन्न रुखों के बीच संतुलन बनाते हुए सदस्यों के मतभेदों को दूर करने में भूमिका निभाई।
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नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है।
संयुक्त बयान पर सहमति
यह बातचीत सुबह करीब 4 बजे तक चली, जिसके बाद सभी पक्षों के बीच सहमति कायम हो सकी।
ब्रिक्स देशों के बीच कई संवेदनशील और विवादित मुद्दों पर मतभेद थे, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़े भू-राजनीतिक हितों को लेकर। ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अलग-अलग रुख के बावजूद भारत ने लगातार सभी पक्षों के साथ बातचीत कर उनके मतभेदों को दूर करने की कोशिश की।
इस कूटनीतिक सफलता को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी।
भारत ने बातचीत और विचार-विमर्श के जरिए अलग-अलग पक्षों के रुख को करीब लाने का काम किया। कई दौर की बातचीत के बाद सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बनी और ब्रिक्स की सर्वसम्मति आधारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफलता मिली।
भारत की कूटनीतिक भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की थी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत इस पर बैलेंसिंग रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने अलग-अलग सदस्य देशों के साथ लगातार बातचीत कर उनके मतभेदों को दूर करने की पहल की।
पश्चिम एशिया में अमेरिका के नेतृत्व में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ईरान के खिलाफ खड़े हैं, जबकि रूस यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझा हुआ है। ऐसे में भारत की यह कूटनीतिक सफलता बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
ब्रिक्स में सभी सदस्य देशों को बराबर का दर्जा दिया जाता है, इसलिए जब तक सभी देश सहमत नहीं हो जाते, अंतिम संयुक्त घोषणा पत्र जारी नहीं किया जा सकता। भारत की इस पहल को उसकी कूटनीतिक क्षमता के तौर पर देखा जा रहा है।
सदस्य देशों के बीच गहन बातचीत के बाद संयुक्त घोषणापत्र जारी करने पर सहमति बन गई है।
सरकारी सूत्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत ने मतभेदों को दूर करने के लिए क्या रणनीति अपनाई?
- भारत ने सभी पक्षों के साथ लगातार बातचीत और विचार-विमर्श किया, जिससे उनके रुख को करीब लाया गया।
- ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति क्यों महत्वपूर्ण है?
- ब्रिक्स में सभी सदस्य देशों को बराबर का दर्जा दिया जाता है और सर्वसम्मति से ही अंतिम दस्तावेज जारी होता है, जिससे सभी देशों की सहमति आवश्यक होती है।
- इस कूटनीतिक सफलता का भारत के लिए क्या मतलब है?
- यह भारत की कूटनीतिक क्षमता को दर्शाती है और पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव के बीच सभी पक्षों को एक साझा बयान पर लाने में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।
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