उदयपुर नगर निगम में भाजपा का सातवां बोर्ड, रिश्तेदारों की जीत
कई दिग्गजों के परिवार के सदस्य जीते, 'मिनी पाकिस्तान' बयान से वार्ड 73 चर्चा में
उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने सातवीं बार बोर्ड बनाने में सफलता प्राप्त की है, जिसमें कई नेताओं के परिवार के सदस्य भी विजयी रहे। हालांकि, वार्ड 73 में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की जीत और निर्दलीय उम्मीदवारों की सफलता से राजनीतिक गतिशीलता बनी हुई है। मावली, भिंडर, वल्लभनगर और कानोड़ नगरपालिकाओं में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने विविध सीटें जीती हैं।
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उदयपुर। उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने सातवीं बार बोर्ड बनाने का रास्ता साफ किया है। कई बड़े नेताओं के करीबी और परिवार के सदस्य इस बार जीत दर्ज कर राजनीतिक चर्चा में रहे। वार्ड 73 में विवादित बयान के बाद कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की जीत ने सियासी हलचल बढ़ाई।
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दामादों के भाई अतुल चंडालिया और आकाश वागरेचा इस चुनाव में विजयी रहे हैं। अतुल चंडालिया भाजपा के मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। भाजपा के प्रमोद सामर ने वार्ड 51 से कांग्रेस के गजेंद्र सिंह को हराया, जबकि पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी ने वार्ड 24 से जीत हासिल की।
वार्ड 73 से पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की भतीजा बहू डॉ. हितांशी शर्मा ने भाजपा की लवली जैन को हराया। यह वार्ड चुनाव के दौरान विवादित बयान "मिनी पाकिस्तान" के कारण सुर्खियों में रहा। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की जीत ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ाई है।
उदयपुर ग्रामीण के भाजपा विधायक फूलसिंह मीणा के वार्ड 60 में भाजपा को बड़ा झटका लगा, जहां पार्टी की बागी उम्मीदवार खुशबू मेहता ने निर्दलीय चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया। वार्ड 11 से भी निर्दलीय कमलेश बोराणा ने जीत दर्ज की।
मावली नगरपालिका में कुल 20 सीटों में कांग्रेस ने 10, भाजपा ने 9 और एक सीट निर्दलीय ने जीती। भिंडर नगरपालिका में कांग्रेस ने 13 और भाजपा ने 12 सीटें हासिल कीं। वल्लभनगर नगरपालिका में भाजपा ने 16 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 4 सीटें मिलीं। कानोड़ नगरपालिका में कांग्रेस ने 14 और भाजपा ने 6 सीटें जीतीं।
उदयपुर नगर निगम में भाजपा का सातवां बोर्ड बनना स्थानीय संगठन की मजबूती दर्शाता है। हालांकि, बागियों की जीत और कुछ नगरपालिकाओं में कांग्रेस की बढ़त से पता चलता है कि जनता ने स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों के आधार पर मतदान किया। अब राजनीतिक दल अध्यक्ष पद के चुनाव और रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वार्ड 73 में कौन सा विवादित बयान आया था?
- वार्ड 73 में चुनाव के दौरान 'मिनी पाकिस्तान' बयान सुर्खियों में रहा, जिसने राजनीतिक चर्चा बढ़ाई।
- अतुल चंडालिया का चुनाव में क्या भूमिका है?
- अतुल चंडालिया भाजपा के मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
- बागी उम्मीदवारों की जीत का क्या अर्थ है?
- बागी उम्मीदवारों की जीत से पता चलता है कि जनता स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों के आधार पर मतदान कर रही है।
- भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों ने कहाँ जीता?
- निर्दलीय उम्मीदवार खुशबू मेहता ने वार्ड 60 में और कमलेश बोराणा ने वार्ड 11 में जीत हासिल की।
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