बस्तर केशकाल घाटी में देवी-देवता थाने में हाजिरी देते हैं
भंगाराम जात्रा में देवताओं की अदालत, क्षेत्र की शांति के लिए अनुमति ली जाती है
बस्तर की केशकाल घाटी में भंगाराम जात्रा का आयोजन हर साल भादो मास में होता है, जिसमें क्षेत्र के देवी-देवता थाने में हाजिरी देते हैं। यह परंपरा क्षेत्र की शांति और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए आयोजित की जाती है, जहां देवताओं से गांव की समस्याओं के निपटारे की मान्यता है। पुलिस अधिकारियों ने देवताओं का स्वागत कर आशीर्वाद लिया।
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बस्तर की केशकाल घाटी में भंगाराम जात्रा शुरू हुई, जिसमें देवी-देवता थाने में हाजिरी देते हैं। यह परंपरा क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए देवताओं से अनुमति लेने की मान्यता पर आधारित है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धापूर्वक देवताओं का स्वागत कर आशीर्वाद लिया।
भंगाराम जात्रा का आयोजन हर साल भादो मास में होता है और इसमें अंचल के नौ परगना के देवी-देवता शामिल होते हैं। पहले दिन सभी देवताओं को सबसे पहले केशकाल थाना परिसर ले जाया गया। सैकड़ों भक्तों के साथ जब देवताओं के प्रतीक चिह्न थाने पहुंचे, तो पुलिस ने माला पहनाकर उनका सम्मान किया। अनुविभागीय अधिकारी पुलिस अरुण नेताम, नगर निरीक्षक विकास बघेल समेत सभी पुलिसकर्मियों ने देवताओं को प्रणाम किया और आशीर्वाद लिया।
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक महापंचायत भी है, जहां दूर-दराज के गांवों के लोग मिलते हैं और सुख-दुख साझा करते हैं। स्थानीय मान्यता है कि साल भर में देवताओं से जुड़े विवाद, परंपरा टूटने या गांव की समस्याओं का निपटारा इसी अदालत में होता है। थाने से लौटकर देवता भंगाराम बाबा के स्थल में ठहरते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भंगाराम जात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- यह परंपरा क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए देवताओं से अनुमति लेने पर आधारित है।
- जात्रा के दौरान सामाजिक गतिविधियाँ क्या होती हैं?
- यह आयोजन एक सामाजिक महापंचायत जैसा होता है जहां गांव के लोग सुख-दुख साझा करते हैं।
- जात्रा के बाद देवताओं का अगला स्थान कौन सा होता है?
- थाने से लौटकर देवता भंगाराम बाबा के स्थल में ठहरते हैं।
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