अकबरपुर में नीम करोली बाबा सर्किट के लिए 8 करोड़ रुपये मंजूर
सरकार ने जन्मस्थली से समाधि स्थल तक धार्मिक पर्यटन केंद्र विकसित करने का फैसला किया
उत्तर प्रदेश सरकार ने अकबरपुर में बाबा नीम करोली महाराज सर्किट के विकास के लिए इस साल 8 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर की है। इसमें जन्मस्थली से समाधि स्थल तक पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है, साथ ही धाम के आसपास 2.24 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। वहीं, तीर्थयात्रियों की आवाजाही आसान करने के लिए दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग-2 की कनेक्टिविटी को चार लेन करने का प्रस्ताव भी लोक निर्माण विभाग को भेजा गया है।
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मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बाबा नीम करोली महाराज ने सादगी, सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश दिया। सरकार पिछले तीन वर्षों से अकबरपुर में उनके जन्मस्थली से समाधि स्थल तक विकास कार्य कर रही है। इस साल भी 8 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर की गई है।
सरकार ने 2023-24 में 8 करोड़ 62 लाख 98 हजार रुपये और 2025-26 में 2 करोड़ 22 लाख 47 हजार रुपये पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित किए हैं। इस वर्ष भी 8 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। धाम के विस्तार के लिए जन्मस्थली के आसपास 2.24 एकड़ जमीन खरीदने का निर्णय लिया गया है।
अकबरपुर स्थित धाम को प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए तीर्थयात्रियों की आवाजाही आसान बनाने हेतु दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग-2 की कनेक्टिविटी को चार लेन करने का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग को भेजा गया है। इससे धाम तक पहुंच बेहतर होगी।
फिरोजाबाद का अकबरपुर बाबा नीम करोली की जन्मस्थली है, जबकि फर्रुखाबाद जिले में संकिसा बौद्ध तीर्थ स्थल के पास उनकी तपोस्थली स्थित है। मान्यता है कि इसी स्थान पर बाबा ने ट्रेन रोकने का चमत्कार किया था। इन तीनों स्थलों को मिलाकर ‘नीम करोली महाराज सर्किट’ बनाया जाएगा।
इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने का उद्देश्य उनके जीवन और विचारों से लोगों को प्रेरणा देना है।
हालांकि छह पोतियों ने डीएम के पास ट्रस्ट पर कब्जे का आरोप लगाया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नीम करोली महाराज सर्किट का उद्देश्य क्या है?
- इस सर्किट का उद्देश्य उनके जीवन और विचारों से लोगों को प्रेरणा देना है।
- सर्किट में कौन-कौन से स्थलों को शामिल किया जाएगा?
- इसमें अकबरपुर की जन्मस्थली, फर्रुखाबाद के संकिसा बौद्ध तीर्थ स्थल और तपोस्थली शामिल हैं।
- नीम करोली महाराज के सम्बन्ध में कोई विवाद है क्या?
- हां, छह पोतियों ने डीएम के पास ट्रस्ट पर कब्जे का आरोप लगाया है।
- सरकार नीम करोली महाराज की स्मृति में क्या काम कर रही है?
- सरकार पिछले तीन वर्षों से जन्मस्थली से समाधि स्थल तक विकास कार्य कर रही है।
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