अलवर में प्याज की खेती का रकबा 20% तक घटने का खतरा
बारिश थमने के बाद किसान खेतों में उतरे, लेकिन महंगे बीज और मजदूरी बढ़ी
अलवर जिले में इस साल प्याज की खेती का रकबा लगभग 20% घटने का खतरा है, क्योंकि बुवाई पहले वर्ष के मुकाबले कम हुई है। महंगे बीज और बढ़ती मजदूरी के कारण छोटे किसानों के लिए लागत बढ़ गई है, जिससे प्याज की खेती पर असर पड़ सकता है।
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अलवर। अलवर जिले में प्याज की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन इस बार रकबा घटने की आशंका है। पिछले साल करीब 18 हजार हेक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई थी, जबकि इस बार अब तक लगभग 11 हजार हेक्टेयर में ही बुवाई दर्ज की गई है।
बारिश थमने के बाद अकबरपुर क्षेत्र के खेतों में प्याज की रोपाई फिर शुरू हो गई है। किसान तैयार खेतों में मजदूर लगाकर पौध लगाने में जुटे हैं। जिन किसानों के लिए प्याज मुख्य फसल है, वे महंगे बीज के बावजूद रोपाई कर रहे हैं। छोटे किसानों के लिए लागत जुटाना मुश्किल हो रहा है, जिससे इस बार प्याज की खेती का रकबा घट सकता है। महंगा बीज और बढ़ती मजदूरी को रकबा घटने की मुख्य वजह माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्याज की खेती में लागत क्यों बढ़ रही है?
- महंगे बीज और मजदूरी की बढ़ती कीमतें किसानों की लागत बढ़ा रही हैं।
- छोटे किसानों के लिए प्याज की खेती क्यों मुश्किल हो रही है?
- छोटे किसानों को लागत जुटाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए वे कम बुवाई कर पा रहे हैं।
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