14 सितंबर को चौरचन पूजा, चंद्र दर्शन शाम को होगा
बिहार और मिथिला क्षेत्र में चंद्रमा की पूजा के लिए घर सजाए गए हैं
14 सितंबर 2026 को बिहार और मिथिला क्षेत्र में चौरचन पूजा मनाई जाएगी, जिसका मुख्य अनुष्ठान सूर्यास्त के बाद चंद्र दर्शन के समय होगा। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और पूर्णिया जैसे शहरों में चंद्रमा शाम को देखा जाएगा और श्रद्धालु पूजा स्थल की सफाई व तैयारी सूर्यास्त से पहले कर लेंगे।
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14 सितंबर 2026 को बिहार और मिथिला क्षेत्र में चौरचन पूजा मनाई जा रही है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि सुबह 7 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा मुख्य रूप से सूर्यास्त के बाद चंद्र दर्शन के समय की जाती है।
इस वर्ष चौरचन पूजा 14 सितंबर, सोमवार को हो रही है। चतुर्थी तिथि सुबह 7 बजकर 06 मिनट से शुरू हो चुकी है और 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा की मुख्य विधि शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद की जाती है, हालांकि खगोलीय गणना के अनुसार चंद्रमा सुबह ही उदित हो चुका है।
सूर्यास्त के बाद चंद्रमा पश्चिमी आकाश में दिखाई देगा, इसलिए पूजा के लिए वह समय उपयुक्त माना जाता है जब सूर्यास्त के बाद चांद नजर आए। बिहार के विभिन्न शहरों में सूर्यास्त का समय कुछ मिनटों का अंतर रखता है।
मुजफ्फरपुर में सूर्यास्त शाम करीब 5 बजकर 54 मिनट पर होगा और चंद्रास्त लगभग 7 बजकर 38 मिनट पर। यहां चंद्रमा शाम 7 बजकर 36 मिनट के आसपास अस्त होगा। श्रद्धालुओं को चंद्र दर्शन और अर्घ्य के लिए करीब पौने दो घंटे का समय मिलेगा।
सीतामढ़ी में चंद्र दर्शन शाम करीब 5 बजकर 52 मिनट के बाद संभव होगा और चंद्रमा 7 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। पूर्णिया में चंद्रमा शाम करीब 5 बजकर 44 मिनट के बाद दिखाई देगा। ये समय नेपाल के स्थानीय समय के अनुसार है।
पूजा से पहले आंगन या पूजा स्थल को साफ करके अरिपन बनाया जाता है। पूजा की डाली में दही, फल, खीर-पूड़ी जैसे पकवान सजाए जाते हैं। श्रद्धालु सूर्यास्त के बाद पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर चंद्रमा को देखते हैं। खुले मैदान या छत जैसी जगह चुनना चाहिए जहां ऊंची इमारतें न हों।
मौसम साफ रहने पर चंद्र दर्शन संभव होगा, लेकिन बादल, बारिश या ऊंची इमारतें बाधा डाल सकती हैं। पूजा की तैयारी सूर्यास्त से पहले पूरी कर लेनी चाहिए ताकि समय पर अर्घ्य दिया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- चंद्रमा दिखने का सही समय कब माना जाता है?
- पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद चंद्रमा पश्चिमी आकाश में जब दिखाई दे, तब का समय उपयुक्त माना जाता है।
- किस दिशा की ओर चंद्रमा को देखना चाहिए?
- श्रद्धालु सूर्यास्त के बाद पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर चंद्रमा को देखते हैं।
- चौरचन पूजा के लिए स्थल चयन में क्या ध्यान रखना चाहिए?
- खुले मैदान या छत जैसी जगह जिससे ऊंची इमारतें न हों, वहां चंद्रमा बेहतर दिखाई देता है।
- चंद्र दर्शन में कौन-कौन सी बाधाएं हो सकती हैं?
- बादल, बारिश या ऊंची इमारतें चंद्र दर्शन में बाधा डाल सकती हैं।
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