स्वतंत्र भारद्वाज ने जताया सीजेपी आंदोलन का समर्थन, फिर क्यों फोड़ा सिर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सिर फोड़ने वाले आरोपी ने खुद को आंदोलन का समर्थक बताया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान सिर फोड़ने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि वह शुरू से ही आंदोलन का समर्थन कर रहे थे और अचानक एक शख्स के रिकॉर्डिंग करने व आपत्तिजनक शब्दों कहने पर उन्होंने प्रतिक्रिया में सिर फोड़ा। पुलिस ने उनके खिलाफ जांच की है और उन्हें नोटिस दिया गया है।
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान सिर फोड़ने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि वह शुरुआत से ही आंदोलन का समर्थन कर रहा था। उन्होंने बताया कि अचानक एक शख्स ने उनकी रिकॉर्डिंग की और आपत्तिजनक बातें कहीं, जिससे उन्हें अपनी बेइज्जती महसूस हुई और उन्होंने प्रतिक्रिया दी।
स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि सीजेपी की तीनों मांगें एकदम ठीक थीं और वह पहले दिन से आंदोलन का साथ देने पहुंचा था। वह शुरुआत में इस आंदोलन का समर्थक था और ऐसे ही इरादों के साथ जंतर-मंतर गया था।
उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर एक शख्स ने कैमरा उनकी तरफ करके रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और कुछ आपत्तिजनक बातें कहीं। उन्हें लगा कि उनकी बेइज्जती हुई है, इसलिए उन्होंने उस शख्स के सिर पर वार किया।
भारद्वाज ने कहा कि वह जूता भी दिल्ली पुलिस का ही पहनता है और एनसीसी से प्रशिक्षित है। उन्होंने माना कि संसद चलो मार्च के दिन उनके हाथ में दिल्ली पुलिस का डंडा था, लेकिन डंडा कहां से आया इसका खुलासा नहीं किया।
उन्होंने दावा किया कि जब दिल्ली पुलिस के दो पुलिसवालों का वीडियो वायरल हुआ था, तो उन्हें सिविल में लाने का आदेश ऊपर से मिला होगा। हर पुलिसवाला लाठीचार्ज कर रहा था, वह भी कर रहे थे। उन्होंने कहा, "हम डंडा लेकर पहुंचे और बोले कि वो पुलिसवाले नहीं रियल गुंडे हम लोग हैं। लाठीचार्ज हमने किया था, जो करना था किया।"
स्वतंत्र भारद्वाज ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में जाने का उनका मकसद विरोध करना नहीं था। उन्होंने बताया कि बाद में उनके पुराने वीडियो के आधार पर उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की गई।
उन्होंने स्वीकार किया कि हाथ में पहने कड़े से चोट लगने की वजह से उस शख्स का सिर फट गया। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वहां पहले उनके ऊपर कई लोगों ने हमला करने की कोशिश की।
उनके खिलाफ पुलिस ने जांच की है और उन्हें सीआरपीसी की धारा 41 के तहत नोटिस दिया गया था। उन्होंने कहा कि जब भी पुलिस की ओर से जांच में सहयोग के लिए बुलाया जाएगा, वह जाएंगे।
स्वतंत्र भारद्वाज ने अभिजीत दीपके और सौरभ दास को धमकी भी दी है। उन्होंने कहा, "उमर खालिद, अभिजीत दीपके, सौरभ भारद्वाज या नेहा बोरा जिस भी प्रोटेस्ट में जाएंगे वहां हम स्वागत के लिए तैयार रहेंगे। इनका इलाज कर देंगे।"
उन्होंने खुद को गौरक्षक, मुस्लिम विरोधी और जातिगत आरक्षण के खिलाफ बताते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर की वापसी और नीट पेपर लीक की वजह से जान देने वाले स्टूडेंट्स के परिवार को मुआवजा देने की मांग एकदम जायज थी।
भारद्वाज ने बताया कि जब वहां प्रेमानंद महाराज और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ टीका-टिप्पणियां होने लगीं, तब वह आंदोलन के खिलाफ हो गए। उन्होंने कहा, "हम नहीं जा रहे थे सीजेपी प्रोटेस्ट में, क्योंकि उनकी मुद्दा और सीजेपी की तीनों मांगें सही थीं। हम वहां गए लेकिन वहां उमर खालिद, केजरीवाल की पूरी स्ट्रैटजी, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, आरएसएस मुर्दाबाद..."
इसके बाद उन्होंने कैमरा बंद करने को कहा था, तो बहस हुई और इस दौरान वह डस्टबिन पर पैर पड़ने से गिर पड़े।
सुधीर झा, वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार और संपादकीय नेतृत्वकर्ता, ने बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने करियर में प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव हासिल किया है। वे वर्तमान में एक प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और कई राज्यों की कवरेज संभालते हैं।
उन्होंने राजनीति, अपराध और प्रशासन से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता प्राप्त की है। सुधीर झा ने डिजिटल पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं।
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