बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रोन्नति के नियम बदले
कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि के लिए साल में दो बार परीक्षा होगी
बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति के नियम बदले गए हैं, जिसमें प्रोन्नति के लिए वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाएगी और न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा। प्रोन्नति के लिए पांच वर्ष की निरंतर सेवा और विभागीय परीक्षा, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट एवं साक्षात्कार के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। यदि योग्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे तो खाली पदों को खुली भर्ती कोटे में स्थानांतरित किया जाएगा।
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बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब प्रोन्नति के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
राज्यपाल सैयद अता हसनैन के दिशा-निर्देश पर बिहार लोक भवन ने कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति से संबंधित नए नियम बनाए हैं। इसके तहत कर्मचारियों को दो इकाइयों में बांटा जाएगा, जिसमें विश्वविद्यालय कार्यालय और स्नातकोत्तर विभाग पहली इकाई होंगे, जबकि सभी अंगीभूत महाविद्यालय दूसरी इकाई के अंतर्गत आएंगे।
प्रोन्नति के लिए न्यूनतम पांच वर्ष की निरंतर सेवा आवश्यक होगी और कर्मचारी को संवर्ग के पिछले निचले पद पर कम से कम पांच वर्ष सेवा पूरी करनी होगी। ग्रेड-पे पार कर सीधे ऊंचे पद पर जाने की अनुमति नहीं होगी।
प्रोन्नति परीक्षा दो पत्रों की होगी, प्रत्येक 100 अंकों का। पहले पत्र में हिंदी टिप्पणी एवं प्रारूपण, वित्त एवं लेखा, क्रय प्रक्रिया, सेवा नियमावली, कार्यालय प्रबंधन, बजट और कंप्यूटर से जुड़े विषय शामिल होंगे। दूसरे पत्र में विश्वविद्यालय अधिनियम, परिनियम, विनियम, अध्यादेश और सरकारी संकल्प से संबंधित सवाल होंगे।
परीक्षा में सफल होने के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा साक्षात्कार के लिए अधिकतम 50 अंक निर्धारित किए गए हैं। प्रोन्नति केवल विभागीय परीक्षा पास करने से नहीं मिलेगी, बल्कि कर्मचारी की पिछले तीन वर्षों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट, विभागीय परीक्षा में प्राप्त अंक और साक्षात्कार के प्रदर्शन को भी देखा जाएगा।
कुलसचिव विश्वविद्यालय कार्यालय के पदाधिकारियों, सचिवीय और चतुर्थवर्गीय कर्मियों के नियंत्री पदाधिकारी होंगे। प्रधानाचार्य संबंधित महाविद्यालय के सभी शिक्षकों और कर्मियों के नियंत्री पदाधिकारी होंगे। विभागाध्यक्ष व संस्थान प्रधान स्नातकोत्तर विभागों और संस्थानों के कर्मियों के नियंत्री पदाधिकारी होंगे।
प्रोन्नति कोटे के पदों के लिए यदि पात्र कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो दो बार प्रयास के बाद भी पद खाली रहने पर कुलपति की सहमति से पदों को खुली सीधी भर्ती के कोटे में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे लंबे समय से खाली पदों के भरने का रास्ता खुलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्रोन्नति प्रक्रिया में किन फैक्टरों को ध्यान में रखा जाएगा?
- प्रोन्नति में विभागीय परीक्षा, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट और साक्षात्कार प्रदर्शन को शामिल किया जाएगा।
- प्रोन्नति परीक्षा के प्रश्नों में क्या-क्या होगा?
- पहले पत्र में हिंदी टिप्पणी, वित्त, सेवा नियमावली आदि और दूसरे पत्र में विश्वविद्यालय अधिनियम एवं सरकारी संकल्प संबंधी प्रश्न होंगे।
- कर्मचारियों को कैसे इकाइयों में बांटा गया है?
- पहली इकाई में विश्वविद्यालय कार्यालय और स्नातकोत्तर विभाग, दूसरी इकाई में सभी अंगीभूत महाविद्यालय शामिल हैं।
- कौन पदाधिकारी विभिन्न कर्मचारियों का नियंत्री होंगे?
- कुलसचिव विश्वविद्यालय कार्यालय के पदाधिकारियों का नियंत्री, प्रधानाचार्य महाविद्यालय के शिक्षकों का नियंत्री और विभागाध्यक्ष स्नातकोत्तर विभाग के कर्मियों के नियंत्री होंगे।
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