प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग 13 सितंबर को नई दिल्ली में मिलेंगे
गलवान संकट के बाद पहली बार दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मिलेंगे। यह शी जिनपिंग की भारत की 2019 के बाद पहली यात्रा होगी और दोनों नेताओं की यह मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की कोशिशों के बीच हो रही है। सीमा विवाद और शांति बनाए रखने के मुद्दे इस बैठक में चर्चा का मुख्य विषय रहेंगे।
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नई दिल्ली। नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की संभावना है। यह उनकी 2019 के बाद भारत की पहली यात्रा होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शाम करीब छह बजे द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है।
भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़प के बाद भारत-चीन संबंध दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। इसके बाद दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हजारों सैनिक तैनात किए और भारत ने चीनी निवेश तथा तकनीक की जांच कड़ी कर दी। सीमा विवाद दोनों देशों के रिश्तों का मुख्य पैमाना बन गया। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना सामान्य संबंध बहाल नहीं हो सकते।
अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक में गश्त की व्यवस्था पर समझौता किया, जिससे 2020 से बाधित भारतीय पहुंच फिर से शुरू हुई। यह राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को बहाल करने की दिशा में एक संभावित शुरुआत माना गया। इसके बाद दोनों नेताओं ने 23 अक्टूबर 2024 को कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले मुलाकात की, जो उच्च-स्तरीय बातचीत को फिर से शुरू करने का महत्वपूर्ण कदम था।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का महत्व
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उन कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों में से एक है जहां प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग एक ही मेज पर बैठेंगे। दोनों देश विरोधी सैन्य गठबंधनों के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि तेजी से उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता के रूप में शामिल होंगे। भारत के लिए यह मंच रणनीतिक स्वतंत्रता का जरिया है, जिससे वह चीन, रूस के साथ काम करते हुए अमेरिका, यूरोप और जापान के साथ भी साझेदारी बनाए रख सकता है।
चीन के लिए ब्रिक्स 'ग्लोबल साउथ' का बड़ा गठबंधन बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में प्रभाव बढ़ाने का माध्यम है। इस सम्मेलन में दोनों नेताओं की मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की कोशिशों के बीच हो रही है। सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और संपर्क बढ़ाने की दिशा में दोनों पक्ष आगे बढ़े हैं, जिससे नई तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
चीन निश्चित रूप से संबंध बेहतर करना चाहता है, लेकिन हम यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि भारत असल में किस हद तक उन्हें बेहतर करने के लिए तैयार है
मिनवांग, चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत-चीन संबंधों को कैसे प्रभावित कर सकता है?
- यह मंच दोनों देशों को रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग को पुनर्जीवित करने का अवसर देता है, जिससे द्विपक्षीय तनाव को कम करने की संभावना बढ़ती है।
- भारत और चीन ने सीमा मुद्दों को लेकर हाल ही में क्या समझौता किया है?
- अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक में गश्त की व्यवस्था पर समझौता हुआ जिससे 2020 के बाद बाधित भारतीय पहुंच फिर से शुरू हुई।
- शी जिनपिंग की भारत यात्रा से क्या उम्मीदें हैं?
- शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच संपर्क बढ़ाने और सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में पहल की उम्मीद है।
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