मालाखेड़ा सब्जी मंडी में कचरे से बदबू, व्यापारियों-किसानों में नाराज़गी
मंडी में सफाई व्यवस्था खराब, शुल्क और टैक्स लेने के बावजूद सुधार नहीं
अलवर के मालाखेड़ा सब्जी मंडी में कचरा जमा होने और बदबू फैलने से व्यापारियों, किसानों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी है। मंडी समिति शुल्क लेने के बावजूद साफ-सफाई में सुधार नहीं हुआ है और किसानों ने सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
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अलवर। अलवर के मालाखेड़ा कस्बे की सब्जी मंडी में गंदगी का अंबार लग गया है। मंडी परिसर में जमा कचरे से तेज बदबू फैल रही है, जिससे व्यापारियों, किसानों और आसपास के ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
व्यापारी और किसान आरोप लगाते हैं कि मंडी में सफाई केवल कागजों तक सीमित है। मंडी समिति शुल्क और टैक्स लेने के बावजूद सफाई व्यवस्था जमीनी स्तर पर खराब है।
मंडी परिसर में नियमित सफाई न होने से कचरा जमा रहता है और तेज बदबू के कारण वहां खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। प्याज के सीजन में मालाखेड़ा सब्जी मंडी से बड़ा कारोबार होता है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं और सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
किसानों ने सवाल उठाया है कि जब मंडी से नियमित आय और टैक्स मिल रहा है, तो सफाई व्यवस्था बेहतर क्यों नहीं की जा रही है। सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि कर्मचारी होने का दावा भी किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मंडी में सफाई की कौन सी मुख्य समस्या है?
- मंडी में सफाई केवल कागजों तक सीमित है और जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा।
- व्यापारी और किसान मंडी सफाई से क्यों असंतुष्ट हैं?
- वे मानते हैं कि अच्छी सफाई के बावजूद वहां बदबू और गंदगी बनी रहती है।
- मंडी में कचरा जमा रहने का क्या प्रभाव है?
- कचरे की बदबू की वजह से मंडी परिसर में खड़ा रहना मुश्किल हो जाता है।
- मंडी से मिलने वाली आय का इस्तेमाल सफाई में क्यों नहीं हो रहा?
- फिरे से कर्मचारी होने का दावा के बावजूद सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।
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